स्मार्ट मीटर के दुष्परिणाम बढ़ते बिल देखकर हजारों की संख्या ने उपभोक्ताओं ने महारैली कर किया विरोध
गली गली मोहल्ले मोहल्ले का विरोध आज सड़कों पर स्मार्ट मीटर नहीं चाहिए नारे के साथ हजारों की संख्या में महारैली निकालकर बिजली विभाग पहुँचे आम उपभोक्ता, गली गली से रैली निकलकर शास्त्रिपार्क पहुँचे नागरिक सदर बाजार रपटा हनुमान चौराहा होते हुए बिजली विभाग में किया रैली का समापन स्मार्ट मीटर नहीं चाहिए के नारे के साथ शहर के हजारों नागरिक रहे महारैली में शामिल।
गुना (आरएनआई) आज बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन की तरफ से गुना के स्थानीय शास्त्री पार्क से सदर बाजार रपटा हनुमान चौराहा होते हुए बिजली विभाग तक एक महारैली निकाली गई । विगत महीनों से पूरे शहर भर सहित आस पास के गांव में स्मार्ट मीटर के खिलाफ आंदोलन चल रहा है । बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन के बैनर तले मोहल्ले मोहल्ले में गली गली में आम नागरिक रैली निकलकर , सभा के द्वार , प्रचार अभियान चलाकर स्मार्ट मीटर का विरोध कर रहें है । इसी विरोध के क्रम में आज महारैली का आयोजन किया गया ।
मध्य प्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन के साथी राकेश मिश्रा और नरेंद्र भदौरिया ने कहा कि " प्राइवेट कंपनी द्वारा शहर भर में आम जनता के भारी विरोध के बाबजूद लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर पर तुरंत रोक लगाई जाए व बिजली के निजीकरण की नीति को रद्द किया जाए।"
विदित हो कि बिजली कंपनी द्वारा गुना शहर में घर घर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहें है । जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं उनके बिजली के बिल पूरे शहर को हैरत और परेशानी में डाल देने वाले हैं ये एक दो लोगो की बात नहीं है जिन कॉलोनी में स्मार्ट मीटर लगे है सभी उपभोक्ताओं के बिल कयी गुना बढ़ के आये है। साथ सरकार की जनहितैषी नीतियों पर कई सवाल खड़े करने वाले हैं।
एसोसिएशन के लोकेश शर्मा ने कहा कि बढ़ती महंगाई,बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और इलाज से जनता पहले से ही परेशान है सरकार इनके निजीकरण पर उतारु है, ऐसे में स्मार्ट मीटर के बिलों ने उनके परेशानियों को बढ़ा दिया है। लोग परेशान हैं लेकिन कहीं पर उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है। ये हालात सिर्फ गुना जिले के ही नहीं बल्कि जहां भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं वहां लोग सड़कों पर निकल कर इसका विरोध कर रहे हैं।एक तरफ सरकार बोल रही है कि बिजली सबके लिए जरूरी है लेकिन वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर लगाकर लोगों के घरों में अंधेरा करना चाहती है।
मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि "कंपनी की तानाशाही को मजबूत करने के लिए सरकार उन्हें खुद के पुलिस थाने खोलने की मंजूरी दे रही है जो कि जनहित के खिलाफ है, बिजली संशोधन विधेयक में बिल न चुका पाने की स्थिति में उपभोक्ताओं का मकान जमीन कुर्क करने का भी प्रावधान है। उपभोक्ता अच्छी तरह जानते हैं कि अगर कम्पनी प्रदेश में या शहर में बड़ी संख्या में मीटर लगाने में कामयाब हो गयी तो बाकि जिलों को या शहर को कम्पनी मीटर लगवाने के लिए मजबूर कर देगी इसलिए ये जरुरी है कि जिले जिले और कालोनी कालोनी में इसका विरोध जरुरी है।"
आनंद सक्सेना और हरि विजयवर्गीय ने कहा कि "बिजली महंगी होने से हर वो चीज भी महंगी हो जाएगी जिसका उत्पादन बिजली की सहायता से किया जाता है। स्पष्ट है कि स्मार्ट मीटर आम जनता के हितों के खिलाफ और बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देकर कंपनियों की अकूत लूट को स्थापित करने वाला है।"
एसोसिएशन के मनोज रजक रवि शर्मा ने कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर निजी कंपनियों द्वारा आम जनता की गाड़ी कमाई को लूटने के लिए लगाए जा रहें है। जनता समझ रही है कि सरकार ने मध्यप्रदेश की बिजली को प्राइवेट कंपनी को ठेके पर दे दिया गया है। बिजली सेवा का क्षेत्र है जिसमें व्यापार नहीं होना चाहिए। सरकार ने जनता के हितों को अनदेखा कर बिजली को निजी हाथों में दे दिया है जो जनता के साथ धोखाधड़ी है। अगर जनता हर चीज का उपयोग करने के बदले उसके बराबर दाम चुकाएगी तो फिर सरकार के पास जनता के टैक्स का पैसा है वो किसके लिए है? स्मार्ट मीटर बिजली पर छूट देने के लिए नहीं बल्कि हर समय लाइट बंद करने का संकेत है।"
महारैली बिजली कम्पनी के दफ्तर पहुंचकर विशाल धरना प्रदर्शन में तब्दील हुई और मांग की गयी कि बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को रद्द किया जाये।
जहाँ जहाँ स्मार्ट मीटर लगाये गये हैं उन्हें हटाकर पुराने मीटर लगायें जायें।
जिन लोगों के बिजली बिल बढ़कर आये है उन्हें सही किया जाये।
उपभोक्ताओं के बिजली सम्बंधित समस्याओं के निराकरण में सुलभता और पारदर्शिता लाई जाये।
मंच के साथी विकास बंसल ने बताया कि ये आंदोलन निरंतर चलता रहेगा जब तक कि सरकार ये नीति वापस नही लेती हम आगामी दिनों में क्रमिक धरना व कालोनी कालोनी गांव गांव में पुतला दहन धरना प्रदर्शन तेज करेंगे।
महारैली में शहर भर के वरिष्ठ सदस्य सहित आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल रहें ।
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