सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के 1 किमी दायरे में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध
नई दिल्ली (आरएनआई)। देश के वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के भीतर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं की जा सकेगी।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ झारखंड के सरंडा वन्यजीव अभयारण्य और ससांगदाबुरू संरक्षण रिजर्व से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि खनन से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति न केवल जंगलों को प्रभावित करती है, बल्कि उन पर निर्भर वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।
पीठ ने कहा, “यह अदालत पहले भी गोवा फाउंडेशन मामले में इस बात को स्पष्ट कर चुकी है कि संरक्षित क्षेत्रों से एक किलोमीटर की दूरी तक खनन गतिविधियां वन्यजीवों के लिए हानिकारक हैं। अब यह दिशा-निर्देश केवल गोवा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में समान रूप से लागू होगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि सरंडा क्षेत्र को शीघ्र वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित किया जाए और इसके साथ ही वहां रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा वन अधिकार अधिनियम के तहत सुनिश्चित की जाए। अदालत ने राज्य सरकार को इस निर्णय के संबंध में जनजागरूकता अभियान चलाने का भी आदेश दिया है ताकि स्थानीय समुदायों को इस फैसले की जानकारी और इसके लाभों का बोध कराया जा सके।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि पहले जहां 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने का प्रस्ताव था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 57,519 हेक्टेयर तक कर दिया गया है। अदालत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देशभर में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब खनन कंपनियों को इन क्षेत्रों से दूर रहना होगा, जिससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी बल्कि जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी।
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