सितंबर 2025 बना इतिहास का तीसरा सबसे गर्म महीना, समुद्री तापमान ने भी तोड़ा रिकॉर्ड
नई दिल्ली (आरएनआई) सितंबर 2025 वैश्विक जलवायु के इतिहास में तीसरा सबसे गर्म सितंबर दर्ज किया गया। इस महीने धरती की सतह का औसत तापमान 16.11 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औद्योगिक क्रांति (1850-1900) से पहले के औसत से 1.47 डिग्री अधिक है। वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु संकट की एक गंभीर चेतावनी माना है।
1.5 डिग्री की सीमा के करीब पहुंचा ग्रह
यूरोपीय एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्तर उस 1.5 डिग्री तापमान वृद्धि सीमा के बेहद नजदीक है, जिसे जलवायु विशेषज्ञ गंभीर जोखिम की रेखा मानते हैं। 1991-2020 के औसत की तुलना में भी यह सितंबर 0.66 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहा।
समुद्र की सतह भी ‘उबलती’ दिखाई दी
वैश्विक समुद्री सतह तापमान (SST) औसतन 20.72°C दर्ज किया गया, जो अब तक का तीसरा सबसे अधिक स्तर है।
उत्तरी प्रशांत महासागर के बड़े हिस्से सामान्य से काफी गर्म पाए गए।
नॉर्वे सागर, काला सागर और भूमध्य सागर में भी असामान्य रूप से अधिक तापमान दर्ज किया गया।
मध्य और पूर्वी प्रशांत में तापमान थोड़ा कम रहा, जो एलग-नीनो की न्यूट्रल स्थिति को दर्शाता है।
?? भारत में तापमान एक दशक के शीर्ष स्तरों पर
आईएमडी और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार:
भारत में सितंबर का औसत तापमान सामान्य से 0.9°C अधिक रहा — यह पिछले 10 वर्षों में दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है।
उत्तर और मध्य भारत में 35 से 40 दिन तक असामान्य गर्मी दर्ज की गई।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 12% अधिक वर्षा हुई।
समुद्री गर्मी से बढ़े चक्रवात
समुद्र के बढ़ते तापमान की वजह से: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों में औसतन 11% की वृद्धि दर्ज की गई।
ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ तेजी से पिघली
आर्कटिक:
समुद्री बर्फ का विस्तार सामान्य से 12% कम रहा।
यह गंभीर स्थिति है, हालांकि 2012 के रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर (-32%) से बेहतर है।
अंटार्कटिका:
बर्फ का विस्तार सामान्य से 5% कम रहा, जो अब तक का चौथा सबसे कम स्तर है।
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