सहरसा: शव ले जाने को एंबुलेंस नहीं, दो परिवारों को मौत के बाद भी मिली बेबसी
सहरसा (आरएनआई) बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था का संवेदनहीन चेहरा गुरुवार को सहरसा सदर अस्पताल में खुलकर सामने आ गया, जहां दो अलग-अलग मामलों में परिजनों को अपने मृत परिजनों के शव खुद ढोकर पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाना पड़ा। अस्पताल परिसर में न एंबुलेंस मिली और न ही किसी प्रकार की सहायता, जिसके चलते दोनों परिवारों को 500 से 600 मीटर तक शव को कंधे और स्ट्रेचर पर ढोकर ले जाना पड़ा।
पहले मामले में पतरघट थाना क्षेत्र के निवासी बुजुर्ग छोटे लाल यादव की मौत के बाद पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए लेकर आई। परिजनों ने एंबुलेंस की मांग की, तो अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट कहा कि कोई वाहन उपलब्ध नहीं है, प्राइवेट एंबुलेंस की व्यवस्था कर लें। मजबूरी में परिजनों ने रोते-बिलखते बुजुर्ग का शव कंधे पर उठाकर पोस्टमार्टम रूम पहुंचाया। परिजन प्रवीण कुमार का कहना था कि अस्पताल में एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद शव ले जाने के लिए एक भी उपलब्ध न होना प्रशासन की गंभीर लापरवाही है।
दूसरी घटना रेलवे स्टेशन पर बेहोशी की हालत में मिले एक व्यक्ति से जुड़ी है, जिसे अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक के भाई सुजीत कुमार के अनुसार, शव देर रात स्ट्रेचर पर बाहर ही छोड़ दिया गया। रेल थाना की औपचारिकताओं के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की बात हुई तो अस्पताल ने फिर वही कारण बताया—न एंबुलेंस और न चालक। अंततः परिजनों ने खुद स्ट्रेचर को धकेलते हुए शव को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया।
परिजनों ने कहा कि मौत के बाद भी उन्हें अपमान और कठिनाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की ऐसी व्यवस्था को इंसानियत की पराजय बताते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
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