संसद का शीतकालीन सत्र शुरू; पीएम मोदी ने विपक्ष को दी नसीहत—‘पराजय की बौखलाहट से बाहर निकलें’
नई दिल्ली (आरएनआई) संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरुआत कर चुका है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। यह 18वीं लोकसभा का छठा सत्र है, जिसमें एटॉमिक एनर्जी सहित 10 नए विधेयकों के पेश होने की संभावना है। वहीं एसआईआर के मुद्दे पर सत्र में भारी हंगामे के आसार हैं।
सत्र की शुरुआत दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसी बीच सत्ता और विपक्ष के बीच तल्खी भी देखने को मिली। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि “वोटों की हेरा-फेरी से बनी सरकार जवाबदेह नहीं बनना चाहती”।
सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “पराजय की निराशा को संसद में मत उतारिए। सदन बहस और नीति निर्माण के लिए है, नारेबाजी और ड्रामा के लिए नहीं।” पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि नए और युवा सांसदों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ दल चुनावी बौखलाहट के कारण सदन का इस्तेमाल अपनी राज्य स्तरीय राजनीति के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिस तरह संसद को चुनावी वार्मअप ग्राउंड बनाया जा रहा है, यह स्वस्थ परंपरा नहीं है। विपक्ष अपनी रणनीति बदले, मैं टिप्स देने के लिए भी तैयार हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत की लोकतांत्रिक और आर्थिक प्रगति पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित कर रही है। “भारत ने सिद्ध किया है कि डेमोक्रेसी कैन डिलीवर। बिहार चुनाव में रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र की ताकत का प्रमाण है।”
पीएम मोदी ने सत्र को “राष्ट्र की प्रगति में नई ऊर्जा का स्रोत” बताते हुए कहा कि यह सत्र यह भी दिखाएगा कि संसद देश के लिए क्या सोचती है और क्या करने जा रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि “पराजय की बौखलाहट” को पीछे छोड़कर रचनात्मक चर्चा में हिस्सा लें।
उधर, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह सत्र आरंभ होने से पहले संसद पहुंचे। दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में पार्टी की रणनीति बैठक जारी है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष बार-बार एसआईआर पर चर्चा की मांग कर रहा है और संसद का उद्देश्य ही चर्चा करना है, इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर विस्तृत बहस करनी चाहिए।
शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही यह साफ है कि आने वाले दिनों में संसद में एसआईआर, आर्थिक मुद्दों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की गूंज तेज रहेगी।
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