संविधान के मूल शब्दों पर आरएसएस की टिप्पणी पर भड़की कांग्रेस, कहा- यह संविधान विरोधी सोच
आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने की मांग की। इस पर कांग्रेस ने आरएसएस और भाजपा की आलोचना की। कांग्रेस ने दोनों पर संविधान विरोधी होने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि वह भाजपा-आरएसएस की साजिश को कभी सफल नहीं होने देगी। साथ ही ऐसे किसी भी कदम का पार्टी विरोध करेगी।
नई दिल्ली (आरएनआई) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा पर संविधान विरोधी होने का आरोप लगाया। कांग्रेस का यह बयान तब आया है जब आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने की मांग की।
कांग्रेस ने एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट कर कहा कि वह भाजपा-आरएसएस की साजिश को कभी सफल नहीं होने देगी। साथ ही ऐसे किसी भी कदम का पार्टी विरोध करेगी। कांग्रेस ने लिखा, 'आरएसएस-भाजपा की सोच संविधान विरोधी है। अब आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने संविधान की प्रस्तावना में बदलाव की मांग की है।'
कांग्रेस ने दावा किया कि होसबोले चाहते हैं कि संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटा दिए जाएं। पार्टी ने कहा, 'यह बाबा साहब के संविधान को नष्ट करने की साजिश है, जिसे आरएसएस-भाजपा लंबे समय से रच रहे हैं।'
विपक्षी पार्टी ने दावा किया कि जब संविधान लागू किया गया था, तब आरएसएस ने इसका विरोध किया था और इसकी प्रतियां जलाई थीं। लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता खुलेआम कह रहे थे कि संविधान बदलने के लिए उन्हें संसद में 400 से अधिक सीटों की जरूरत है, लेकिन जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया। कांग्रेस ने कहा, 'अब एक बार फिर वे अपनी साजिशों में लगे हैं, लेकिन कांग्रेस किसी भी कीमत पर उनके इरादों को सफल नहीं होने देगी। संविधान की जय हो।'
आरएसएस नेता होसबोले ने बृहस्पतिवार को संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन शब्दों को आपातकाल के दौरान जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि ये कभी भी बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार संविधान का हिस्सा नहीं थे। आपातकाल पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबोले ने कहा, 'बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान की प्रस्तावना में कभी ये शब्द नहीं रखे थे। आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका लंगड़ी हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए।'
राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में होसबाले ने कहा, आपातकाल थोपने वाले लोग आज संविधान जेब में लेकर घूम रहे हैं। इसके लिए उन्होंने आज तक देश के लोगों से माफी नहीं मांगी। इन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। आपातकाल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक लाख लोगों को जेल में डाल दिया गया था।
उन्होंने कहा, आपातकाल के दौरान 60 लाख लोगों की जबरन नसबंदी कर दी गई थी और 250 पत्रकारों को जेल में डाला गया था। इतना ही नहीं, न्यायपालिका को पंगु बना दिया गया लेकिन माफी नहीं मांगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि गलती आपके पूर्वजों ने की थी, इसके लिए आपको देश से माफी मांगनी चाहिए।
होसबोले ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को जोड़ा गया। इन दोनों शब्दों को रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान बनाया, उनकी प्रस्तावना में ये दोनों शब्द नहीं थे।
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