राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला: “चुनाव आयोग के जरिए लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है BJP”
नई दिल्ली (आरएनआई) संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव की निष्पक्षता खतरे में है और भाजपा चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए कर रही है।
राहुल गांधी ने खादी की संस्कृति और भारतीयता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश की एकजुटता और 150 करोड़ लोगों की भावना का प्रतीक है। इसी संदर्भ में उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस देश की सभी संस्थाओं पर नियंत्रण चाहता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाला नाथूराम गोडसे आरएसएस से जुड़ा था और “यह एक असहज लेकिन सच्ची बात है जिसे भुलाया नहीं जा सकता।”
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलरों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए और कहा कि योग्यता से अधिक महत्व संघ से जुड़ाव को दिया जा रहा है। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें केवल चुनाव सुधार के मुद्दे पर केंद्रित रहने को कहा।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि केंद्रीय एजेंसियों — सीबीआई और ईडी — के बाद अब चुनाव आयोग पर भी “एक संस्था” से जुड़े लोगों का कब्जा हो गया है। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव कर उन्हें दंडित न किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया, जो 2024 के आम चुनाव से ठीक पहले किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही समाप्त करने की कोशिश बताया।
राहुल गांधी ने वोट चोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि हरियाणा की वोटर सूची में एक विदेशी महिला की फोटो 22 बार छपी मिली तथा बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के बाद एक लाख से अधिक डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ दर्ज हुईं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को नियंत्रित करके चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी की जा रही है, और यह “डेटा” का नहीं बल्कि “लोकतंत्र की सुरक्षा” का प्रश्न है।
कांग्रेस नेता ने मांग की कि मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट चुनाव से एक महीने पहले सभी राजनीतिक दलों को दी जाए और सीसीटीवी फुटेज नष्ट करने के नियम तुरंत बदले जाएँ।
राहुल गांधी ने कहा, “वोट चोरी देशद्रोह है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन सरकार चुनाव सुधारों से भाग रही है। अगर चुनाव ही पारदर्शी नहीं रहेंगे, तो संविधान और संस्थाओं का अस्तित्व कैसे बचेगा?”
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