मुख्य चुनाव आयुक्त बोले: चुनाव के बाद SIR का कोई अर्थ नहीं, आधार UID नागरिकता का प्रमाण नहीं
पटना (आरएनआई) बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को पटना में संवाददाताओं से बात करते हुए मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव के बाद SIR (Special Summary Revision) कराने का कोई अर्थ नहीं है और आधार कार्ड न तो जन्मतिथि न ही नागरिकता का प्रमाण है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि 22 नवंबर से पहले चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न करा ली जाएगी। सभी उम्मीदवारों को पोलिंग एजेंट नियुक्त करने और मॉक पोल की निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों के वोटर कार्ड में बदलाव होगा, उन्हें 15 दिनों के अंदर ई-पिक (EPIC) प्रदान किया जाएगा।
वोटर सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण बिहार में 243 विधानसभा क्षेत्रों में किया गया। आयोग ने पहली बार बूथ लेवल एजेंट्स और अधिकारियों की ट्रेनिंग दिल्ली में आयोजित की और मानदेय बढ़ाया। इस बार सभी 90,000 मतदान केंद्रों पर मोबाइल रखने की व्यवस्था रहेगी और 1,200 से अधिक मतदाता किसी भी बूथ पर नहीं होंगे।
चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्याशियों को मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में स्टॉल लगाने की अनुमति दी गई है और हर पोलिंग स्टेशन की 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा ईवीएम-वीवीपैट की मैचिंग और पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ही अंतिम ईवीएम की गणना होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव और मतदाता सूची बनाना अलग प्रक्रियाएं हैं। मतदाता सूची में किसी भी त्रुटि की शिकायत ईआरओ और डीएम स्तर पर की जा सकती है। आयोग ने तकनीक का सहारा लेते हुए वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET के माध्यम से बिहार चुनाव में पूरी प्रक्रिया और ट्रैकिंग सुनिश्चित की है।
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