महिलाओं को 10 हजार रुपये ट्रांसफर पर सियासत गरमाई; शरद पवार बोले— संसद में जवाबदेही तय होगी
मुंबई (आरएनआई)। बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये भेजने का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार ने रविवार को संकेत दिया कि वे इस मामले को आगामी संसद सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे। पवार का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसी प्रत्यक्ष धनराशि योजना पहले कभी नहीं देखी गई और यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाला बड़ा कारण हो सकती है।
पवार ने पुणे में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे इस मुद्दे पर संसद में विपक्षी दलों के बीच समन्वय बनाकर चर्चा की मांग करेंगे। उन्होंने दावा किया कि बिहार में सरकार द्वारा महिलाओं को चुनाव पूर्व सीधे 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया अभूतपूर्व रही है। उनके अनुसार, स्थानीय निकाय चुनावों में पैसे बांटने की बातें भले पहले सुनी गई हों, लेकिन किसी राज्य सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी आर्थिक सहायता दिया जाना राजनीतिक तौर पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पवार ने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के नाम पर परिवार की एक महिला को व्यवसाय शुरू करने के लिए राशि भेजी गई। यह कदम चुनावी माहौल में लागू किया गया, जिससे परिणामों पर असर पड़ने की संभावना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लाड़की बहिन योजना और बिहार में महिलाओं के खातों में सीधे धनराशि भेजना— दोनों जगह चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर किया गया।
उन्होंने कहा कि अगर बिहार में एनडीए की जीत का बड़ा कारण यह प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ योजना है, तो इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए बेहद गंभीरता से परखना होगा। पवार ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को भी ऐसे मामलों में अधिक सतर्कता बरतने की ज़रूरत है, क्योंकि आचार संहिता के दौरान किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता पर सामान्यतः रोक रहती है।
शरद पवार पहले भी पूछ चुके हैं कि चुनाव आयोग ने इस तरह की धनराशि वितरण को अनुमति कैसे दी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह परंपरा राजनीति में स्थापित हो गई तो आने वाले राज्यों के चुनावों में भी इसका व्यापक असर दिखाई दे सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र में विपक्ष इस पर सरकार से जवाब मांगने के लिए एकजुट होगा।
पवार के अनुसार, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना समाज और कल्याण योजनाओं के खिलाफ नहीं है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले ऐसी योजनाओं का लागू होना लोकतंत्र की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। वे चाहते हैं कि संसद में इस मुद्दे पर ठोस और पारदर्शी जवाब मिले ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनी रहे।
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