मराठा आरक्षण आंदोलन का अंत; भावुक हुए मनोज जरांगे, बोले– आज हमारे लिए दिवाली
मुंबई (आरएनआई) मराठा आरक्षण आंदोलन में मनोज जरांगे ने पांच दिन के अनशन के बाद जीत का एलान किया और कहा कि सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं। जरांगे ने सरकार को दो महीने का समय दिया है कि मराठा और कुनबी को एक ही समुदाय मानते हुए जीआर जारी करे। जरांगे ने बताया कि सरकार ने आंदोलन में जान गंवाने वाले परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने का वादा भी किया है।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा मंगलवार को कार्यकर्ता मनोज जारंगे की अधिकांश मांगों को स्वीकार करने के तुरंत बाद जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सरकारी प्रतिनिधिमंडल द्वारा जरांगे से मुलाकात करने और उनकी मांगों को स्वीकार करने के बाद जैसे ही जरांगे ने जीत की घोषणा की, प्रदर्शन स्थल पर उनके समर्थकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। अंतरवाली सराटी में भी स्थानीय निवासी सड़कों पर उतर आए, भगवा झंडे लहराए, ढोल बजाए और जरांगे के समर्थन में नारे लगाए। मराठा आरक्षण आंदोलन का आध्यात्मिक और रणनीतिक केंद्र माने जाने वाले इस गांव में समर्थकों ने ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया और लोगों में भारी उत्साह देखा गया।
मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों से पुलिस ने आजाद मैदान खाली करा लिया है। यहां सफाई का काम चल रहा है।
मनोज जरांगे ने भाजपा मंत्री राधाकृष्ण विके पाटील द्वारा पेश किया गया जूस पीकर उपवास तोड़ा। राधाकृष्ण विखे पाटिल मराठा आरक्षण पर गठित कैबिनेट उपसमिति के अध्यक्ष हैं। उपवास खत्म करने के बाद जरांगे एंबुलेंस से अस्पताल जांच ले जाया गया। जालना जिले के रहने वाले 43 वर्षीय जरांगे अब छत्रपति संभाजीनगर के उल्कानगरी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती होंगे।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनकी हालत सामान्य है और उन्हें आईसीयू में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले भी वह इसी अस्पताल में इलाज करा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जरांगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। वहीं, आंदोलन खत्म होने के बाद मराठा समाज ने इसे बड़ी राहत के रूप में देखा है।
मराठा आरक्षण आंदोलन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार ने ऐसा संवैधानिक समाधान निकाला है, जो न केवल मराठा समाज की मांगों को पूरा करता है बल्कि ओबीसी कोटे पर भी कोई खलल नहीं डालेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण सामूहिक रूप से किसी समुदाय को नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर उस व्यक्ति को दिया जाएगा, जो अपने दावे को प्रमाणित करेगा। इसके लिए हैदराबाद गजट को आधार बनाया गया है।
आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन खत्म करने के बाद कहा कि आज हमारे लिए दिवाली है, हमें जो चाहिए था, वह मिल गया। सरकार की ओर से जारी सरकारी आदेश (जीआर) स्वीकार करते हुए उन्होंने भावुक होकर उपवास तोड़ दिया। इस दौरान वो फूट-फूट कर रोते हुए नजर आए। राज्य सरकार की कैबिनेट उपसमिति के प्रमुख राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे का आभार व्यक्त किया और कहा कि सरकार मराठा समाज को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उपसमिति ने हैदराबाद गजट लागू करने और कुनबी प्रमाणपत्र देने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद आंदोलनकारी खुश नजर आए और माहौल में उत्सव जैसी स्थिति दिखी।
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