भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना को बड़ी कामयाबी, जलते हुए सिंगापुरी जहाज को बेपोर तट से दूर किया
केरल तट से 42 समुद्री मील दूर सिंगापुर का कंटेनर जहाज एमवी वान हाई 503 में आग लग गई थी। कड़ी मशक्कत के बाद भी आग बुझाई नहीं जा सकी। अब आईसीजी और नौसेना ने जहाज को तट से दूर कर दिया है।
कोच्चि (आरएनआई) भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। दोनों रक्षा इकाइयों ने जलते हुए सिंगापुरी जहाज एमवी वाह हाई 503 को सावधानी पूर्वक बेपोर तट से दूर कर दिया है। यह आग को नियंत्रित करने और समुद्री पर्यावरण की रक्षा के प्रयासों में मील का पत्थर है। नौ जून को श्रीलंका कोलंबो से मुंबई जा रहे जहाज के कंटेनर में विस्फोट के बाद केरल के कन्नूर जिले के अझिक्कल से लगभग 44 समुद्री मील दूर और कोच्चि से 130 समुद्री मील उत्तर पश्चिम में आग लग गई थी।
एक्स पर एक पोस्ट में भारतीय तटरक्षक बल ने कहा कि एमवी वाह हाई 503 पर आग को बुझाने और समुद्री पर्यावरण की रक्षा के लिए चल रहे ऑपरेशन में एक प्रमुख मील का पत्थर। अग्निशमन अभियान चला रहे भारतीय तटरक्षक जहाजों ने चुनौतीपूर्ण और कठिन ऑपरेशन में बचाव पोत को टो करके तट से दूर करने में सक्षम बनाया।
पोस्ट में लिखा गया कि भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर से बचाव दल को नीचे उतारने का काम सौंपा। बचाव दल ने टो को आईसीजी जहाजों से साल्वेज टग में स्थानांतरित कर दिया। टो अब शुरू हो गया है और पोत को हमारे तट से दूर रखने के लिए खींचा जा रहा है। आईसीजी का अग्निशमन अभियान जारी है।
सात जून को कोलंबो से रवाना हुआ जहाज 10 जून को मुंबई पहुंचने वाला था। 270 मीटर लंबा और 12.5 मीटर व्यास वाला जहाज 1.2 लाख मीट्रिक टन ईंधन और सैकड़ों कंटेनर ले जा रहा था। आग लगने के बाद जहाज समुद्री पर्यावरण और क्षेत्रीय शिपिंग मार्गों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा था। प्रतिकूल समुद्री हालात के बावजूद आईसीजी ने जहाज को तट से सुरक्षित रूप से दूर कर दिया है। इससे तेल रिसाव या अन्य समुद्री आपदाओं का खतरा कम हो गया है।
इससे पहले गुरुवार को भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) और भारतीय नौसेना ने नई दिल्ली में तटरक्षक मुख्यालय (सीजीएचक्यू) में एक उच्च स्तरीय बैठक की थी।बैठक में दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त कौशल, अंतर-संचालन और समन्वित हवाई संचालन को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई थी। साथ ही अधिकारियों ने भारत की समुद्री विमानन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, उड़ान सुरक्षा प्रोटोकॉल और भविष्य की परिसंपत्ति अधिग्रहण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श किया था।
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