भतीजे और ड्राइवर के नाम पर खोली कंपनी, धोखाधड़ी से लिया ऋण, 22.3 करोड़ का एनपीए, बेनामी स्वामित्व का खेल
नई दिल्ली (आरएनआई) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कोच्चि ज़ोनल कार्यालय की जांच में 21 नवंबर को पीवी अनवर और अन्य से जुड़े परिसरों पर छापों में बड़े खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि संदिग्ध बेनामी स्वामित्व छिपाने के लिए कंपनियों को भतीजों और ड्राइवर के नाम पर खोला गया और केरल फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (केएफसी) से धोखाधड़ी कर ऋण प्राप्त किया गया। ऋण की राशि निर्धारित कार्यों में न लगाकर अन्य जगह उपयोग में लाई गई, जिसके चलते कुल 22.3 करोड़ रुपये की राशि एनपीए घोषित हो गई।
ईडी की कार्रवाई 2015 में केएफसी द्वारा दिए गए कुल 7.5 करोड़, 3.05 करोड़ और 1.5 लाख रुपये के ऋण तथा मेसर्स पीवीआर डेवलपर्स को स्वीकृत 1.56 करोड़ रुपये के ऋण की जांच से जुड़ी है। इन ऋणों को एक ही संपार्श्विक पर कम अंतराल में मंजूर किया गया था, जिसके चलते एनपीए की कुल राशि 22.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। प्रारंभिक साक्ष्यों में यह भी संकेत मिले हैं कि धनराशि का दुरुपयोग हुआ, नाममात्र के निदेशकों का उपयोग किया गया और संपत्तियाँ बेनामी स्वामित्व वाली थीं। इसी आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया।
यह छापेमारी मेसर्स मलमकुलम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स पीवीआर डेवलपर्स, मेसर्स बिस मंजेरी एलएलपी, केएफसी की मलप्पुरम शाखा और संबंधित व्यक्तियों के आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत परिसरों पर की गई। तलाशी में पीवी अनवर ने स्वीकार किया कि मेसर्स मलमकुलम कंस्ट्रक्शंस के वास्तविक लाभार्थी वे ही हैं, जबकि कंपनी उनके भतीजों और ड्राइवर के नाम पर थी। उन्होंने यह भी माना कि ऋण राशि का उपयोग पीवीआर मेट्रो विलेज नामक एक बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट में किया गया।
ईडी ने पाया कि 2015-20 के दौरान नकारात्मक आय घोषित करने के बावजूद पीवी अनवर की संपत्ति 2016 में 14.38 करोड़ रुपये से बढ़कर 2021 में 64.14 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसका संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। उनके सहयोगियों ने बताया कि दस्तावेज़ उनके निर्देश पर हस्ताक्षरित किए जाते थे, धनराशि को संबद्ध संस्थाओं में डायवर्ट किया जाता था और कुछ नकद संग्रह नियमित लेखा व्यवस्था से बाहर रखे जाते थे। मलमकुलम कंस्ट्रक्शन द्वारा पीवीआर मेट्रो विलेज में कई इमारतें बिना स्थानीय प्राधिकरणों की मंजूरी के बनाई गई थीं।
तलाशी में स्कूल, मनोरंजन पार्क, रिसॉर्ट, विला और अपार्टमेंट जैसी बड़े पैमाने की निर्माण गतिविधियों के प्रमाण मिले। जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से यह संकेत मिला कि ऋण की राशि को संबंधित कंपनियों में स्थानांतरित कर मंजूर योजना से असंबंधित कार्यों में उपयोग किया गया।
केएफसी अधिकारियों के बयान में यह सामने आया कि ऋण स्वीकृति के दौरान प्रक्रियात्मक खामियां थीं, पुराने बंधकों का सत्यापन नहीं किया गया और कई ऋणों में एक ही संपार्श्विक का उपयोग किया गया। तकनीकी अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि कुछ मूल्यांकन रिपोर्ट बिना नए निरीक्षण के दोबारा उपयोग में लाई गईं।
तलाशी में 15 बैंक खातों की पहचान की गई, जो कथित तौर पर बेनामी व्यक्तियों के नाम पर संचालित थे और जिनमें संदिग्ध लेनदेन हुए। जब्त सामग्री की जांच जारी है, ताकि ऋण गड़बड़ी की पूरी संरचना, लेयरिंग प्रक्रिया, बेनामी संपत्तियों और अपराध की आय की पूरी सीमा का पता लगाया जा सके।
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