बिना सहमति स्मार्ट मीटर प्रीपेड करना गैरकानूनी, यूपी में 33 लाख उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन
लखनऊ (आरएनआई) बिना उपभोक्ताओं की सहमति स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदला जाना विद्युत अधिनियम 2003 का खुला उल्लंघन है। इस मुद्दे पर देश के ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने भी हाल ही में लोकसभा में स्थिति स्पष्ट करते हुए माना है कि पोस्टपेड व्यवस्था अब भी डिफॉल्ट मोड के रूप में लागू है। उन्होंने लिखित उत्तर में बताया कि आरडीएसएस योजना के अंतर्गत फिलहाल स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी कार्यालयों, वाणिज्यिक संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों तथा उच्च भार वाले उपभोक्ताओं के यहां स्थापित किया जा रहा है। अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं पर प्रीपेड मीटर लगाने पर तभी विचार किया जाएगा, जब इस व्यवस्था के लाभ स्पष्ट रूप से सामने आ जाएंगे।
इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में बिजली कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में गरीब और छोटे घरेलू उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटरों को बिना उनकी सहमति के पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में परिवर्तित किया जा रहा है। प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में अब तक लगभग 53 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 33 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर बिना अनुमति के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए हैं। इसे उपभोक्ता संगठनों ने पूरी तरह मनमाना और कानून के विरुद्ध करार दिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अंतर्गत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर चुनने का स्पष्ट वैधानिक विकल्प दिया गया है। यह एक राष्ट्रीय कानून है और किसी भी स्तर पर इसका उल्लंघन स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य श्री अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब स्वयं केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा में यह स्वीकार किया है कि पोस्टपेड सेवा डिफॉल्ट मोड है और प्रीपेड मीटरों का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाना है, तो फिर प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं के विकल्प को समाप्त क्यों कर रहा है। उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के अधिकारों पर सीधा प्रहार बताते हुए विद्युत अधिनियम 2003 का खुला उल्लंघन बताया।
श्री वर्मा ने कहा कि अभी भी समय है कि पावर कॉरपोरेशन का उच्च प्रबंधन देश के कानून का सम्मान करे और किसी भी उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर को उसकी लिखित सहमति के बिना प्रीपेड मोड में परिवर्तित न किया जाए। उपभोक्ताओं को उनका वैधानिक विकल्प हर स्थिति में दिया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पावर कॉरपोरेशन के उच्च प्रबंधन ने अपनी कार्यप्रणाली में शीघ्र सुधार नहीं किया और उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन जारी रहा, तो उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद इस मुद्दे को केंद्रीय स्तर पर उठाएगी और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करने के लिए बाध्य होगी।
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