फिर शुरू मौसम की मार पर झोलाछापों का वार, गर्मी व बारिश की चालू जुगलबंदी के बीच दिखने लगी गांव-गांव आमद
फतेहपुर (आरएनआई) झोलाछापों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चलाए जाने वाले अभियान ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं। जिस बात का खुलासा बदलते मौसम से पता चल रहा है। इस बार भी गांव गांव, गली गली झोलाछाप की दखल दिखने के बावजूद, जनता की सेहत की सलामती की दिशा में काम नहीं किया जा रहा है।
29 लाख से अधिक की आबादी वाले जिले की स्वास्थ्य सेवाएं देखते बन रही हैं। सरकारी सिस्टम स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रहा है। जिससे झोलाछाप, अपनी दुकानों को चलाकर मरीजों को लूट रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले भर में साढ़े तीन हजार के आसपास झोलाछाप सक्रिय हैं। जिनकी सक्रियता का खामियाजा ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है। जब तब इनके गलत इलाज का सच सामने आने के बाद भी झोलाछापों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। गर्मी और बारिश की मौजूदा जुगलबंदी के बीच जिस तरह से यह अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं। उससे तमाम ग्रामीणों की जान खतरे में पड़ सकती है क्योंकि ज्यादातर के पास न तो कोई डिग्री है और न ही अनुभव।
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बना रखे हैं गांव-गांव एजेंट
फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यशैली के कारण झोलाछाप सारा दिन एक गांव से दूसरे गांव की परिक्रमा करते दिखाई दे रहे हैं। बाइक और स्कूटी का हॉर्न बजाते हुए मरीज के बीच पहुंचने वाले झोलाछापों ने अपने एजेंटों को भी तैनात कर रखा है। जिन्हें प्रति मरीज वसूली जाने वाली रकम का 10 से 20 फ़ीसदी अंश दिया जा रहा है।
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विभागीय कार्रवाई से पहले चल जाता पता
फतेहपुर। इलाज की दुकानें चल रहे झोलाछापों पर कोई कार्रवाई होने से पहले उन्हें जानकारी हो जा रही है। कुछेक विभागीय, झोलाछाप की ढाल बने नजर आ रहे है। हालांकि नोडल अफसर डॉक्टर इश्तियाक अहमद जरूर अपने स्तर से इन पर अंकुश लगाने की भरसक कोशिश में जुटे रहते हैं।
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