पाकिस्तान के हथियार खरीदने पर भारत की बढ़ी चिंता, वाइस एडमिरल स्वामीनाथन बोले—चीन है ‘स्थायी चुनौती’
मुंबई (आरएनआई)। भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल के. स्वामीनाथन ने पाकिस्तान और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मुंबई में ब्रह्मा रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान दुनिया भर से तेज़ी से हथियार खरीद रहा है, जबकि चीन की आक्रामक रणनीति और विस्तारित नौसैनिक क्षमता भारत के लिए दीर्घकालिक, स्थायी चुनौती बनी हुई है।
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन के अनुसार, चीन की नौसेना आज दुनिया की सबसे बड़ी नौसेनाओं में गिनी जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले मात्र दस वर्षों में चीन ने उतना नौसैनिक बेड़ा तैयार किया है, जितना भारतीय नौसेना के पास मौजूद है। चीन न सिर्फ दक्षिण चीन सागर में, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय और आक्रामक होता जा रहा है।
उन्होंने खुलासा किया कि चीन 5 से 8 जहाजों—जिनमें युद्धपोत, रिसर्च वेसल, सैटेलाइट ट्रैकिंग शिप और फिशिंग वेसल शामिल हैं—को भारत के आसपास लगभग स्थायी रूप से तैनात रखता है। उनका तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ‘फुजियान’ और नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन उसकी वैश्विक सैन्य महत्वाकांक्षा का संकेत देता है।
पाकिस्तान की तेज़ हथियार खरीद से चिंता
वाइस एडमिरल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना तेजी से हथियार और गोला-बारूद खरीद रही है, जबकि देश के नागरिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की यह गतिविधि न केवल भारत, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप के लिए चिंता का विषय है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत का वह जवाबी सैन्य अभियान था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके के आतंकी ठिकानों के साथ कुछ एयरबेस को भी निशाना बनाया गया था। यह अभियान पाहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद चलाया गया।
पाकिस्तान-चीन की मिलीभगत अब खुलकर सामने
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच जो सहयोग पहले पर्दे के पीछे माना जाता था, वह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खुलकर सामने आ गया। उन्होंने यह भी बताया कि तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को दिया जा रहा समर्थन—हथियार आपूर्ति और राजनीतिक मदद—एक उभरती हुई नई चुनौती है।
‘भारत निर्णायक जवाब देने में सक्षम’
सम्मेलन में उपस्थित एयर मार्शल राकेश सिन्हा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत की तीनों सेनाएं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—पूरी तरह समन्वित होकर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन करने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि इस अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने समय और स्थान पर निर्णायक जवाब देने में सक्षम है, अब परमाणु ब्लैकमेल भारत को नहीं रोक सकता।
सिन्हा के अनुसार, इस ऑपरेशन में भारतीय ड्रोन और एयरबोर्न वॉर्निंग सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत की सुरक्षा नीति से जुड़े इन बयानों को क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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