पश्चिम बंगाल में एसआईआर जागरूकता अभियान तेज, अल्पसंख्यक संगठन और इमाम कर रहे मदद; मुस्लिम समुदाय को फॉर्म भरने में मार्गदर्शन
कोलकाता (आरएनआई) — पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अल्पसंख्यक संगठनों, मस्जिद समितियों और इमामों ने मुस्लिम समुदाय के बीच जागरूकता फैलाने का बड़ा अभियान शुरू किया है। मस्जिदों से अपील की जा रही है कि लोग घबराएं नहीं, शांति बनाए रखें और एसआईआर फॉर्म सावधानीपूर्वक भरें।
राज्यभर की लगभग 40 हजार मस्जिदों से इमाम लोगों को फॉर्म भरने की प्रक्रिया समझा रहे हैं और अफवाहों से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। कोलकाता की रेड रोड मस्जिद के प्रमुख इमाम काजी फजलुर रहमान ने कहा कि “इमामों की जिम्मेदारी सिर्फ मिंबर तक सीमित नहीं है। हम लोगों को जागरूक कर रहे हैं, ताकि कोई गलती न हो और कोई व्यक्ति वोटर सूची से बाहर न रह जाए।” मस्जिद समितियां अब फॉर्म भरने और दस्तावेज़ जांच में लोगों की मदद कर रही हैं।
एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगी, जिसके तहत लगभग 80,000 बूथ-लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाता सूची से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
‘इतने कम समय में 10 करोड़ लोगों की जांच संभव नहीं’
कोलकाता की नक्खोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने कहा कि इतने कम समय में इतनी बड़ी आबादी की जांच करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने चिंता जताई कि इससे “भय और उत्पीड़न का माहौल” बन सकता है। कासमी ने कहा कि गरीब और दस्तावेज़विहीन परिवार पहले से ही तनाव में हैं, इसलिए मस्जिदों में अब ट्रेनिंग सेशन और सहायता शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां लोगों को फॉर्म भरने, दस्तावेज़ जमा करने और सत्यापन प्रक्रिया के बारे में सिखाया जा रहा है।
22 जिलों में 200 से अधिक कैंप और हेल्पलाइन सक्रिय
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी के नेतृत्व में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने राज्य के 22 जिलों में 200 से अधिक सहायता कैंप और व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू की हैं। चौधरी ने कहा कि यह एक गैर-राजनीतिक अभियान है, जिसका उद्देश्य है कि कोई भी नागरिक गलती से गलत जानकारी न दे या डुप्लिकेट एंट्री में न फंसे।
‘भय का माहौल बन रहा है’
ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के महासचिव मुहम्मद कमरुज़्ज़मां ने बताया कि संगठन प्रतिदिन लगभग 500 से अधिक कैम्प आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा, “लोग फॉर्म भरने से डर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि गलती होने पर उनका नाम सूची से हट सकता है। हम उन्हें भरोसा दिला रहे हैं कि जिनके पास वैध दस्तावेज़ हैं, उनका वोट पूरी तरह सुरक्षित है।” उन्होंने यह भी कहा कि महिला मतदाताओं, विशेषकर विधवाओं या अकेली महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।
राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा
पश्चिम बंगाल में 30% से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, जो राज्य की लगभग 100 विधानसभा सीटों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसी कारण एसआईआर प्रक्रिया राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मानी जा रही है। टीएमसी ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया से उत्पन्न तनाव और डर के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि भाजपा ने इसे “राजनीतिक नाटक” करार दिया है।
राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों ही स्तरों पर अपील की जा रही है कि मतदाता घबराएं नहीं, बल्कि जागरूकता शिविरों में भाग लेकर अपने दस्तावेज़ सही तरीके से अपडेट कराएं ताकि किसी का नाम मतदाता सूची से न छूटे।
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