नेहरू पर शाह की टिप्पणी पर कांग्रेस का पलटवार, इतिहासकार के हवाले से कहा—‘यह सरासर झूठ’
नई दिल्ली (आरएनआई) संसद के शीतकालीन सत्र में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोप के बाद कांग्रेस ने कड़ा प्रतिवाद किया है। पार्टी ने इस दावे को ‘सरासर झूठ’ करार देते हुए प्रसिद्ध इतिहासकार और महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी के बयान का हवाला दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राजमोहन गांधी का एक विस्तृत वीडियो एक्स पर साझा किया, जिसमें इतिहासकार ने शाह के दावे को तथ्यहीन बताया है।
अमित शाह ने बुधवार (10 दिसंबर) को लोकसभा में कहा था कि आज़ादी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए होने वाली वोटिंग में सरदार पटेल को 28 वोट और नेहरू को सिर्फ दो वोट मिले थे, फिर भी नेहरू प्रधानमंत्री बन गए—इसे उन्होंने ‘वोट चोरी’ का उदाहरण बताया। कांग्रेस ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐतिहासिक तथ्यों के साथ जोड़कर ‘मनगढ़ंत’ बताया।
कांग्रेस का जवाब: “शाह का दावा तथ्यहीन”
कांग्रेस ने कहा कि अमित शाह का यह बयान इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का प्रयास है। जयराम रमेश द्वारा साझा वीडियो में राजमोहन गांधी ने स्पष्ट किया कि 1946 में जो चयन प्रक्रिया चल रही थी, वह प्रधानमंत्री की नहीं बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष की थी।
राजमोहन गांधी ने क्या स्पष्ट किया?
राजमोहन गांधी के अनुसार—
1946 में प्रदेश कांग्रेस समितियां (PCCs) केवल कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नाम भेजती थीं, प्रधानमंत्री चुनने का प्रश्न ही नहीं उठा था।
कई PCCs ने सरदार पटेल का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया था, यह उन्हें सम्मान देने का प्रयास था।
नेहरू का नाम किसी PCC ने नहीं भेजा था, लेकिन बाद में महात्मा गांधी ने स्थिति स्पष्ट की और अध्यक्ष पद के लिए नेहरू को चुना गया।
महात्मा गांधी ने पटेल और कृपलानी—दोनों से अपने नाम वापस लेने को कहा, और दोनों ने उनकी बात स्वीकार की।
इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने सर्वसम्मति से नेहरू को अध्यक्ष चुना और स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश शासन के साथ समझौते की प्रक्रिया के दौरान वही प्रधानमंत्री बने।
राजमोहन गांधी ने यह भी कहा कि यदि इतिहास में कहीं भी यह प्रमाण मिल जाता कि कांग्रेस या देश सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाना चाहता था, तो उसका उल्लेख जरूर मिलता।
उन्होंने बताया कि 1950 में अपनी मृत्यु से मात्र दो माह पहले, सरदार पटेल ने इंदौर में एक भाषण देते हुए कहा था—
“नेहरू का प्रधानमंत्री बनना देश के लिए सबसे उपयुक्त था और गांधीजी का फैसला बिल्कुल सही था।”
इस बयान से कांग्रेस को यह बल मिला कि सरदार पटेल खुद नेहरू के प्रधानमंत्री बनने का समर्थन करते थे।
राजनीतिक माहौल में फिर उठा इतिहास का विवाद
अमित शाह के बयान ने स्वतंत्रता पूर्व वर्षों के नेतृत्व चयन को लेकर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। कांग्रेस ने इसे सरकार की ओर से इतिहास को विकृत करने का प्रयास बताया है, जबकि भाजपा अपने आरोपों पर कायम है।
संसद सत्र के बीच यह विवाद राजनीतिक तापमान को और बढ़ा रहा है, और स्वतंत्रता संग्राम तथा उसके बाद के नेतृत्व चयन को लेकर नया विमर्श पैदा कर रहा है।
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