नेपाल में उठी संविधान संशोधन की मांग, जनता बोली- भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कदम उठाएं पीएम
काठमांडू निवासी लीला लुइटेल ने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश से संविधान में बदलाव होना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके। ऐसे ही कई अन्य लोगों ने भी सुशासन के लिए संविधान संशोधन की मांग उठाई।
काठमांडू (आरएनआई) शुक्रवार रात में सुशीला कार्की ने नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही बीते कई दिनों से जारी नेपाल में हंगामे और हिंसा का दौर थम गया। नेपाल में हिंसा के दौरान 51 लोगों की जान चली गई और सैंकड़ों घायल हो गए। इस पूरे हंगामे और बवाल के बाद अब नेपाल के लोग चाहते हैं कि संविधान में संशोधन किया जाए ताकि भ्रष्टाचार का खात्मा किया जा सके। शुक्रवार को नेपाल संसद को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया और 5 मार्च 2026 तक आम चुनाव कराना तय किया गया है।
काठमांडू के निवासी सुमन सिवाकोटी ने बताया कि 'मैं उम्मीद कर रहा हूं कि वे (सुशीला कार्की) नेपाल में नए युग की शुरुआत करेंगी। देश को बचाने की जरूरत है और साथ ही उनके नेतृत्व में विकास को गति देने की भी जरूरत है।' एक अन्य व्यक्ति राम कुमार सिमखड़ा ने कहा कि अंतरिम सरकार को सुशासन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई सरकार को देश में हर गलत चीज को खत्म करने, देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने की जरूरत है। कैबिनेट मंत्रियों को, जो वकील, जज, शिक्षक, डॉक्टर आदि हों, जो अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हों, वे प्रशासन में बेहतरी लाएं। एक अन्य काठमांडू निवासी लीला लुइटेल ने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश से संविधान में बदलाव होना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके।
शुक्रवार को शपथ लेते ही सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बन गईं। उन्हें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में शपथ दिलाई। सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, काठमांडू के मेयर बालेन शाह, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश सिंह रावत उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने यह नियुक्ति संविधान की धारा 61 का हवाला देते हुए की। धारा 61 (4) के अनुसार राष्ट्रपति का मुख्य कर्तव्य संविधान का पालन और संरक्षण करना तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना है।
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