देश में हर आठ मिनट में लापता हो रहा एक बच्चा; सुप्रीम कोर्ट चिंतित—कहा, यह बेहद गंभीर स्थिति

Nov 18, 2025 - 14:32
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देश में हर आठ मिनट में लापता हो रहा एक बच्चा; सुप्रीम कोर्ट चिंतित—कहा, यह बेहद गंभीर स्थिति

नई दिल्ली (आरएनआई)। देश में बच्चों के लापता होने के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यदि यह दावा सही है कि भारत में हर आठ मिनट में एक बच्चा लापता हो जाता है, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासन और सरकार को अधिक जवाबदेही और तत्परता दिखानी होगी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि उन्होंने अखबार में यह आंकड़ा पढ़ा है, हालांकि इसकी पुष्टि की आवश्यकता बताई। उन्होंने टिप्पणी की कि देश में गोद लेने की प्रक्रिया अत्यधिक जटिल और कठोर है, जिसके कारण कई लोग अवैध तरीकों का विकल्प चुनने को मजबूर हो जाते हैं। कोर्ट ने केंद्र को इस प्रक्रिया को सरल बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उधर, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत से छह सप्ताह का समय मांगा, ताकि लापता बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा सके। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुरोध ठुकराते हुए केंद्र को 9 दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।

इससे पहले, 14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को यह निर्देश दिया था कि वे प्रत्येक राज्य में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें, ताकि मिशन वात्सल्य पोर्टल पर दर्ज लापता बच्चों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो सके। अदालत ने यह भी कहा था कि शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारी को तुरंत सूचना भेजना अनिवार्य होना चाहिए।

कोर्ट ने पहले गृह मंत्रालय के तहत एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल बनाने का भी निर्देश दिया था, जहां सभी राज्यों के अधिकारी समन्वय के साथ लापता बच्चों की खोज और जांच कर सकें। अदालत ने कहा था कि वर्तमान समय में विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय की कमी के कारण कई मामलों में जांच की गति धीमी हो जाती है।

यह मामला एनजीओ गुरिया स्वयंसेवी संस्थान की ओर से दायर याचिका पर चल रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के पांच ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें नाबालिग बच्चों का अपहरण कर उन्हें बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में तस्करी कर भेज दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने एक बार फिर देश में बच्चों की सुरक्षा, तस्करी और गुमशुदगी जैसे मुद्दों पर प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बच्चों से जुड़े मामलों में देरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

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