गुना बाढ़ त्रासदी: जब सब जानते थे खतरा, फिर भी नहीं रुकी रजिस्ट्री और निर्माण!

जब तालाब, नदियों, नालों के भराव क्षेत्र पर या उसके आसपास 15 मीटर निर्माण नहीं कर सकते तो कैसे बिकी जमीन?क्या विभागों के अफसरों ने बरती लापरवाही?

Aug 4, 2025 - 13:24
Aug 4, 2025 - 13:25
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गुना बाढ़ त्रासदी: जब सब जानते थे खतरा, फिर भी नहीं रुकी रजिस्ट्री और निर्माण!

गुना (आरएनआई) गुना में भीषण बारिश के बाद गोपालपुरा तालाब की पार तोड़ने से आई बाढ़ से दर्जनों कॉलोनियों में बाढ़ से नुकसानी, मौतों के बाद आज भी नुकसानी का वास्तविक आंकलन नहीं हुआ हैं,सिर्फ कागजी सर्वे में सिर्फ एक मिनिट में मकान मालिक का नाम ही दर्ज करने की जानकारी कुछ पीड़ित लोगों ने दी।

गुना शहर में आई बाढ़ के पूर्व कलेक्टरों फ्रैंक नोबेल ए सहित वर्तमान कलेक्टर किशोर कन्याल ने भी अपनी पदस्थापना के वाद बारिस के पूर्व राजस्व विभाग,नपा एवं जलसंसाधन ओर pwd विभाग को दो माह पूर्व शहर के तमाम नदी,नालों,छोटी नदियों,तालाबों के कैचमेंट एरिया,अतिक्रमण सहित उनको पूर्व आकार में लाने के लिए सर्वे और उन तमाम अतिक्रमण, बनाए आवासों पर वैधानिक कार्यवाही कर हटाने के निर्देश दिए थे।

लेकिन कोलैप्स सिस्टम ने लापरवाही बरती और निर्देश को कागजी मानकर दवा दिया। ओर जिम्मेदारों ने भी कोई कार्यवाही नहीं की।

अब चूंकि वारिस आनी थी सो समय के पूर्व ही आ गई और भारी बारिश से जनजीवन बेहाल होने लगा।

बीती 29 तारीख की दोपहर  भारी बारिश ने सभी रिकॉर्ड तोड़े और पानी के तालाबों,गुनिया नदी,पनारिया नदी,भुजरिया एवं सिंगवाशा तालाब,नालों ने जल भराव और बहाव के सैलाब ने गुना वासियों को अपने स्टोरेज क्षेत्र,तमाम पूर्व रास्तों में हुई अतिक्रमण,कब्जे,रहवास मकानों को अपने रौद्र वहाब की हद में लेकर रौद्रता दिखा दी। जो जान, मॉल की नुकसानी, सम्पत्ति सहित अनाजों की बर्बादी किसी से नहीं छुपी हैं। न ही उन पीड़ित परिवारों के आंसु।

सुविग जानकारी अनुसार अब सवाल इस बात का हैं कि नदी,नालों,तालाबों,जल बहाव क्षेत्र में जल संसाधन विभाग की गाइड लाइन अनुसार उस क्षेत्र में 15 मीटर तक पक्के निर्माण नहीं हो सकते हैं, न ही उस जगह किसी निर्माण कि रजिस्ट्री भी नियम अनुसार,तो फिर नदियों,नालों सहित तालाबों की जमीन की बिक्री ओर रजिस्ट्री कैसे हुई?

वही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की गाइड लाइन के मुताबिक चाहे नई कालोनी का निर्माण करना हो या किसी अन्य प्रकार का निर्माण करना हो। शहरी इलाके में मेन नालों से 9 मीटर दूर निर्माण किया जाना चाहिए। जो नियम में हैं तो वह सब बाते क्या नक्शे में प्रदर्शित नहीं की गई,या गलत जानकारियों के आधार पर ये रजिस्ट्री हुईं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह भी हैं बाढ़ पीड़ित लोग अपने अधिकारों के साथ हुए धोखा को लेकर शासन के प्रमुख मुख्यमंत्री और प्रशासन के प्रमुख कलेक्टर से तमाम दोषियों पर कार्यवाही की मांग करते हुए तमाम अतिक्रमण,कब्जा, निर्माण को हटाने के साथ शहर को आने बाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने कर रहे हैं।

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