गुना जिला पंचायत की बैठक में हंगामा, DFO के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक का आयोजन जिला पंचायत सभागार में किया गया। बैठक में DFO के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।  वन समिति की अध्यक्ष को गंभीरता से न लेने और सुझावों को दरकिनार करने के कारण यह प्रस्ताव पेश किया गया था। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। 

Thursday, September 4, 2025 - 21:27
Updated: 1 year ago
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गुना जिला पंचायत की बैठक में हंगामा, DFO के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

गुना (आरएनआई) जिला पंचायत की सामान्य सभा की मीटिंग जिला पंचायत अध्यक्ष अरविंद धाकड़ की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में चांचौड़ा विधायक प्रियंका पेंची भी मौजूद रहीं। बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली सहित अन्य मसलों पर चर्चा की गई। 

बैठक में वन समिति की सभापति सावित्री दामोदर शर्मा अपना इस्तीफा लेकर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि DFO अक्षय राठौर उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। उनको रिस्पांस भी नहीं देते। उनसे कई बार बैठकों का आयोजन करने को कहा, लेकिन बैठक आयोजित नहीं की गई। एक बार बैठक आयोजित हुई तो DFO भोपाल चले गए। इसलिए ऐसी समिति का सभापति होने का क्या फायदा। इसलिए बैठक में इस्तीफा पेश किया था। सभी सदस्यों ने इस मुद्दे पर चर्चा की और DFO के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसे पारित किया। 

अध्यक्ष अरविंद धाकड़ ने बताया कि बैठक में वन विभाग, PWD सहित कई विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचे थे। इसलिए बैठक में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया। साथ ही अनुपस्थित अधिकारियों को हर बैठक में आवश्यक रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए। 

जिला पंचायत उपाध्यक्ष और शिक्षा समिति की अध्यक्ष सारिका क्षितिज लुंबा ने स्कूलों को स्थिति के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्कूलों के मेंटेनेंस के लिए जो राशि आती है, उसका इस्तेमाल शासन के नियम अनुसार किया जाए। शासन का नियम है कि पालक शिक्षक संघ की नियमित बैठक आयोजित हो और उसमें ये लेखा जोखा रखा जाए। इसका पालन करना सुनिश्चित हो। बैठक में बताया गया कि स्कूलों की मरम्मत के लिए शासन से राशि मिली है। बैठक में यह तय किया गया कि इस राशि से स्कूलों की मरम्मत कराई जाए और उसकी मॉनिटरिंग हो। साथ ही अभी जो राशि मिली है, वो बहुत कम है। शासन से और राशि की मांग के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा जाए। 

इसी तरह बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर रखने के लिए की जाने वाली राशि में एकरूपता नहीं है। कहीं केवल दस प्रतिशत राशि लेकर ट्रांसफार्मर रख दिया जाता है, तो कहीं ज्यादा राशि मांगी जाती है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विद्युत विभाग के लिए एक समिति का गठन किया जाए, जो इस मामले को देखे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि टीम गठित कर गौशालाओं की जांच की जाए।

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