केरल में अब कोई भी परिवार गरीबी रेखा के नीचे नहीं, देश के लिए केरल मॉडल गर्व की बात
(सिद्धार्थ रामू)
तिरुवनंतपुरम (आरएनआई) – भारत में केरल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब केरल में कोई भी परिवार या व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे नहीं है। नीति आयोग (पूर्व योजना आयोग) की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय केरल में केवल 0.7 प्रतिशत लोग अत्यधिक गरीबी रेखा के नीचे थे। इस 0.7 प्रतिशत आबादी को चिन्हित कर केरल सरकार ने ठोस कदम उठाए और उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफल रही।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस उपलब्धि की औपचारिक घोषणा की है। इसे मनाने के लिए 1 नवंबर को राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
केरल बनाम अन्य राज्यों की स्थिति
नीति आयोग की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में 14.96 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। इसमें गुजरात में 11.66 प्रतिशत, बिहार में 33.76 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 22.93 प्रतिशत लोग शामिल हैं। नीति आयोग ने गरीबी को बहुआयामी दृष्टिकोण (Multidimensional Poverty Index – MPI) से मापा, जिसमें केवल आर्थिक आय नहीं, बल्कि जीवन-स्तर, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकताएं शामिल हैं।
केरल सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले 64,006 परिवारों को चिन्हित किया। इनमें से 21,263 परिवार ऐसे थे जिनके पास वोटर आईडी, आधार कार्ड या राशन कार्ड नहीं था। इन परिवारों को गरीबी से बाहर लाने के लिए अलग-अलग कदम उठाए गए। 3,913 परिवारों को घर उपलब्ध कराए गए, 1,338 परिवारों को जमीन दी गई और 5,651 परिवारों को टूटे-फूटे घर की मरम्मत के लिए प्रति परिवार 2 लाख रुपये प्रदान किए गए।
राज्य सरकार के प्रयासों में स्थानीय निकायों, पंचायतों, जिला परिषदों, महापालिकाओं और नगर पालिकाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विपक्षी पार्टियों के नियंत्रण वाले निकायों ने भी मिलकर काम किया।
शिक्षा और स्वास्थ्य में केरल का मॉडल
केरल मानव विकास सूचकांक (HDI) में भारत का शीर्ष राज्य है। नीति आयोग की 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, केरल को 79 अंक मिले, जबकि दूसरे स्थान पर तमिलनाडु को 78 अंक प्राप्त हुए। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में केरल का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय है।
साक्षरता दर: 96.2% (भारत औसत 77.7%, विश्व औसत 86.5%)
जीवन प्रत्याशा: 78.26 वर्ष (भारत औसत 72 वर्ष, विश्व औसत 73.1 वर्ष)
स्वास्थ्य सेवा: प्रति व्यक्ति लगभग 1,000 रुपये खर्च, भारत औसत 250 रुपये से कम
डॉक्टर उपलब्धता: प्रति 1,000 व्यक्ति 1 डॉक्टर (WHO मानक के अनुसार उत्कृष्ट)
जन्म दर में शिशु मृत्यु दर: 1000 जन्म में सिर्फ 5 बच्चे मृत, अमेरिका में 5.6 और भारत में 25
केरल में स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 97% माताएं प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्स की देखरेख में बच्चों को जन्म देती हैं।
समावेशी विकास और बहुसांस्कृतिक समाज
केरल का समाज हिंदू, मुस्लिम और ईसाई तीनों समुदायों का मिश्रित समाज है। यह राज्य दिखाता है कि विभिन्न धर्मों के लोग शांति, सौहार्द और सहयोग के साथ रहते हुए प्रदेश को उन्नत बना सकते हैं।
प्रवासी मजदूरों के लिए केरल मॉडल
केरल में 3.61 करोड़ आबादी में लगभग 31 लाख प्रवासी मजदूर कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने उनके लिए आवास, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और राशन कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। मजदूरी के मामले में केरल में मजदूरों को औसतन 700 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में चार गुना अधिक है।
केरल ने गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, मानव विकास और समावेशी समाज के मामले में उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह मॉडल न केवल भारत बल्कि विश्व के विकसित देशों के मानकों के अनुरूप है। केरल की सफलता यह साबित करती है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति, समावेशी नीतियां और समाज की सहभागिता हो तो गरीबी और असमानता को समाप्त किया जा सकता है।
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