कान्हा के चरणों को छूने को आतुर यमुना, ग्रामीण बाढ़ से बेहाल
यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कोयला अलीपुर और आसपास के गांवों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। खेत और गलियों में 3-4 फीट तक पानी भर गया है, जिससे किसानों की धान और चारे की फसलें डूब गई हैं।
मथुरा (आरएनआई) द्वापर में कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद आकाशवाणी को सुन वासुदेव नवजात को टोकरी में रख गोकुल ले जाने लगे। यमुना की लहरों में घिरे वासुदेव ने नदी का रौद्र रूप देखा तो विचलित हो गए। कोई-ले, कोई ले की पुकार करने लगे। तब यमुना ने श्रीकृष्ण के चरण छूए और लौटने लगीं।
कोई-ले, कोई ले की पुकार पर यमुना के घाट का नाम कोईला पड़ा जिसे आज कोयला अलीपुर गांव के नाम से जाना जाता है। यहां आज भी वासुदेव की टोकरी में बालक कान्हा को लिए प्रतिमा मौजूद है। यमुना का बढ़ा जलस्तर वासुदेव को एक बार फिर घेरने लगा है। लग रहा है मानो द्वापर काल की लीला एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। एक बार फिर यमुना नदी की लहरें भगवान श्रीकृष्ण के पैर छूने को मचल रही है। इधर गांव के लोग यमुना के रौद्र रूप को देख विचलित है। ग्रामीणों में चर्चा है अब तो यमुना नदी भगवान श्रीकृष्ण को स्पर्श करने के बाद ही लौटेंगी।
यमुना के उफान से कोयला अलीपुर और आसपास के गांवों में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। खेतों और गलियों में कई फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोग पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से कोयला अलीपुर, दामोदरपुर, औरंगाबाद क्षेत्र के खेतों में 3-4 फीट तक पानी भर गया है।
धान व चारे की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र बनाए हैं और प्रभावितों के लिए सुरक्षित स्थान मुहैया कराए जा रहे हैं। पानी भरने से दो दर्जन से अधिक कालोनियां व कई गांव गंभीर रूप से प्रभावित हैं। ग्रामीणों को ट्रैक्टर, नाव आदि के सहारे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
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