एसआईआर के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी, चुनावी मोड में तेज़ हुईं ममता बनर्जी की रैलियां
कोलकाता (आरएनआई) बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक टकराव तेज़ हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस मुद्दे पर केंद्र सरकार व भाजपा को घेरने के लिए बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान छेड़ चुकी है। सरकार के विरोध के बावजूद एसआईआर की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, और इसे रोकने तथा इसके खिलाफ जनमत तैयार करने के लिए ममता बनर्जी अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई हैं।
टीएमसी ने दिसंबर महीने में राज्य के विभिन्न इलाकों में बड़ी रैलियों की श्रृंखला तैयार की है। ममता बनर्जी इस हफ्ते मालदा और मुर्शिदाबाद में विशाल जनसभाएं करेंगी। इसके बाद 9 दिसंबर को कूच बिहार में एक और बड़ी रैली को संबोधित कर वह केंद्र सरकार पर निशाना साधेंगी। इन सभाओं के माध्यम से वह एसआईआर को लेकर जनता में बढ़ रही आशंकाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हैं।
इससे पहले ममता बनर्जी ने पिछले हफ्ते बोनगांव में एसआईआर विरोधी रैली की थी। यह इलाका मतुआ समुदाय का गढ़ माना जाता है, जो एसआईआर लागू होने से चिंतित है। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल परिवारों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि पार्टी जिला स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर अभियान तेज कर रही है।
मालदा, मुर्शिदाबाद और कूच बिहार तीनों सीमावर्ती जिले हैं, जहां अल्पसंख्यक समुदाय, प्रवासी व विस्थापित लोगों की बड़ी आबादी रहती है। इन समुदायों में एसआईआर को लेकर सबसे ज्यादा आशंकाएं देखी जा रही हैं। टीएमसी इसी असंतोष को राजनीतिक रूप देने और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटी है।
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