आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ आज से आरंभ, चार दिनों तक रहेगी पूजा की धूम

Oct 25, 2025 - 10:21
 0  108
आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ आज से आरंभ, चार दिनों तक रहेगी पूजा की धूम

नई दिल्ली (आरएनआई): आस्था, अनुशासन और पवित्रता का प्रतीक महापर्व छठ पूजा आज से पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ आरंभ हो गया है। शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को नहाय-खाय के पावन अनुष्ठान के साथ चार दिवसीय इस व्रत की शुरुआत हुई। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में इस पर्व की छटा देखने को मिल रही है। गली-गली में स्वच्छता, घाटों पर तैयारियां और छठ गीतों की गूंज वातावरण को भक्ति में रंग रही है।

छठ पूजा का कार्यक्रम
पहला दिन (नहाय-खाय) – 25 अक्टूबर 2025

दूसरा दिन (खरना) – 26 अक्टूबर 2025

तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य) – 27 अक्टूबर 2025

चौथा दिन (उषा अर्घ्य) – 28 अक्टूबर 2025

चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती आत्मशुद्धि, संयम और समर्पण के साथ सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं।

नहाय-खाय की विधि और महत्व
पहले दिन व्रती स्नान कर पवित्रता के साथ शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। यही भोजन छठ व्रत की शुरुआत का प्रतीक होता है। इस दिन घर में शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। गंगाजल से बने भोजन को मिट्टी या कांसे के बर्तनों में पकाया जाता है।

छठ पूजा के दौरान मांसाहार, प्याज और लहसुन का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है। व्रती इस दौरान जमीन पर सोते हैं और शरीर-मन को पूर्ण रूप से भक्ति में समर्पित करते हैं।

छठ पूजा सामग्री सूची
गन्ना, कपूर, दीपक, धूपबत्ती, फूल, पान, सुपाड़ी, शहद, हल्दी, नारियल, केला, शरीफा, सिंदूर, गुड़, चावल, गेहूं, ठेकुआ, फल, और सूप-दउरा जैसे पारंपरिक सामान पूजा में उपयोग किए जाते हैं। अर्घ्य के समय बांस की टोकरी में पूजा सामग्री रखकर सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि निर्जला उपवास गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। यदि वे व्रत रखना चाहें, तो डॉक्टर की सलाह के बाद हल्के फलाहार और तरल आहार जैसे नारियल पानी, दूध या फलों के रस के साथ व्रत कर सकती हैं।

छठ का धार्मिक महत्व और कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठ महापर्व की शुरुआत रामायण काल में हुई थी, जब माता सीता ने सूर्य देव की पूजा कर व्रत रखा था। वहीं महाभारत काल में द्रौपदी ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपने संकट दूर किए थे। सूर्यपुत्र कर्ण, जो प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देते थे, इस व्रत की आस्था और शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।

छठी मैया की आराधना
छठी मैया को सूर्य देव की बहन और संतान सुख की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी पूजा करने से परिवार में खुशहाली, समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है। व्रती संध्या और उषा काल में सूर्य को अर्घ्य देकर मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।

आरती से गूंजे घाट और घर
नहाय-खाय के साथ आज घर-घर में छठी मैया की आरती गूंज रही है—
“ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए…” भक्तों के मुख से गूंजती यह आरती श्रद्धा, भक्ति और लोकसंगीत का अनुपम संगम है।

Follow RNI News Channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VaBPp7rK5cD6X

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
RNI News Reportage News International (RNI) is India's growing news website which is an digital platform to news, ideas and content based article. Destination where you can catch latest happenings from all over the globe Enhancing the strength of journalism independent and unbiased.