अव्यवस्थाओं के बीच गुजरा जीवन, अंतिम संस्कार भी तिरपाल के नीचे
बरसात में तिरपाल डालकर हुआ अंतिम संस्कार, नगर निगम क्षेत्र के श्मशान घाट की बदहाली।
मथुरा (आरएनआई) पूरा जीवन अव्यवस्थाओं के बीच गुजरा और मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार भी तिरपाल तानकर करना पड़ा। यह हाल मथुरा नगर निगम क्षेत्र का है। यहां के लोग ग्राम प्रधान नहीं बल्कि महापौर चुनते हैं और विकास का लेखाजोखा रखने के लिए ग्राम विकास अधिकारी नहीं बल्कि आईएएस अधिकारी होता है जिसे नगर आयुक्त कहा जाता है।
बरसात के मौसम में जब लोग घर से बाहर निकलना भी मुश्किल समझते हैं, ऐसे में मथुरा नगर निगम क्षेत्र वार्ड नंबर 11, मुड़ेसी के एक परिवार को अपने 76 वर्षीय बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ा।
परिजन जब श्मशान घाट पहुंचे तो वहां की बदहाल स्थिति देखकर परेशान हो गए। श्मशान घाट पर बारिश से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। न तो टीन शेड लगा है और न ही बैठने की सुविधा। मजबूरी में परिवारजन और नगर निगम क्षेत्र के लोगों ने तिरपाल डालकर चिता को बारिश से बचाया और अंतिम संस्कार किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। वर्षों से बरसात या धूप में लोग इसी तरह तिरपाल डालकर या खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। कई बार पार्षद और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन आज तक श्मशान घाट का कोई सुधार कार्य नहीं हुआ।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट पर जल्द से जल्द टीन शेड, बैठने की व्यवस्था, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका कहना है कि यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है, जिस पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए।
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