अमेरिका: 9/11 हमले की 24वीं बरसी पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएँ
अमेरिका ने 9/11 आतंकी हमलों की 24वीं बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। न्यूयॉर्क, पेंटागन और शैंक्सविल में समारोह हुए, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। पीड़ितों के नाम पढ़े गए और मौन रखा गया।
वॉशिंगटन (आरएनआई) अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों को 24 साल पूरे हो गए। इस मौके पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। न्यूयॉर्क, पेंटागन और पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविल में विशेष समारोह हुए। इन हमलों में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। पीड़ितों के परिवार और राजनीतिक हस्तियां कार्यक्रमों में शामिल हुईं।
न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थल पर पीड़ितों के नाम पढ़े गए। मौके पर उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस मौजूद रहीं। हमले के समय को याद करते हुए मौन रखा गया। पेंटागन में 184 लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप इस समारोह में शामिल हुए और शाम को ब्रॉन्क्स में आयोजित बेसबॉल मैच में पहुंचे।
पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविल में फ्लाइट 93 के यात्रियों और क्रू को याद किया गया। उन्होंने विमान का कंट्रोल छीनने की कोशिश की थी। वहां मौन, पुष्प अर्पण और नाम पढ़ने का कार्यक्रम हुआ। इसमें वेटरन्स अफेयर्स सेक्रेटरी डग कॉलिन्स ने हिस्सा लिया।
देशभर में हजारों लोगों ने इस बरसी को सेवा दिवस के रूप में मनाया। लोगों ने फूड ड्राइव, कपड़ों का दान, पार्क साफ करने और खूनदान जैसे कार्यक्रमों में भाग लिया। पीड़ितों के परिजनों ने कहा कि सेवा कार्य के जरिए दुख में भी सुकून और नई ऊर्जा मिलती है।
11 सितंबर 2001 के हमले अल-कायदा ने किए थे। इसमें 2,977 लोग मारे गए, जिनमें फाइनेंशियल वर्कर, पुलिस और दमकलकर्मी शामिल थे। इसके बाद अमेरिका ने ग्लोबल वॉर ऑन टेरर शुरू किया और अफगानिस्तान व इराक पर हमले किए। लाखों सैनिकों और नागरिकों की जानें गईं।
हमलों के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद को 2003 में पाकिस्तान से गिरफ्तार किया गया, लेकिन अब तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ। न्यूयॉर्क में 9/11 मेमोरियल और म्यूजियम बने हैं, जहां पीड़ितों के नाम दर्ज हैं। ट्रंप प्रशासन इसे राष्ट्रीय स्मारक बनाने पर विचार कर रहा है। वहीं, हमलों के बाद जहरीली धूल से प्रभावित 1,40,000 से ज्यादा लोग अब भी स्वास्थ्य निगरानी कार्यक्रमों में शामिल हैं।
ये दिन दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है। अल-कायदा से जुड़े आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया और उन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल कर अमेरिका के दिल पर वार किया। इस हमले में करीब 3,000 लोगों की जान गई और हजारों घायल हुए। 24 साल बाद भी उस दिन का दर्द और खौफ लोगों की यादों में जिंदा है।
यह हमला सुबह आठ बजकर 46 मिनट पर पहला अपहृत विमान अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट-11, न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की नॉर्थ टावर से जा टकराया। इसके 17 मिनट बाद यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट-175 ने साउथ टावर को निशाना बनाया। दोनों गगनचुंबी इमारतें कुछ ही घंटों में राख में तब्दील हो गईं। इस मंजर ने पूरी दुनिया को दहला दिया।
तीसरा विमान, अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट-77, सुबह नौ बजकर 37 मिनट पर अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन से टकराया, जिसमें 184 लोगों की मौत हुई। चौथे विमान, यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट-93, का मकसद व्हाइट हाउस या कैपिटल हिल को निशाना बनाना था। लेकिन यात्रियों ने बहादुरी दिखाते हुए आतंकियों से मुकाबला किया। विमान शैंक्सविल, पेनसिल्वेनिया के खेत में गिरा और सभी सवारों की जान गई।
कुछ ही घंटों में अमेरिका का सबसे सुरक्षित समझा जाने वाला देश दहशत के साये में डूब गया। एयर ट्रैफिक बंद कर दिया गया और आपातकाल जैसे हालात बन गए। बचाव कार्य में हजारों दमकलकर्मी, पुलिसकर्मी और सेना के जवान जुटे। लेकिन कई लोग मलबे में दबकर मर गए, जिनकी आज भी याद श्रद्धांजलि समारोहों में की जाती है।
हमले के पीछे सीधे तौर पर आतंकी संगठन अल-कायदा का हाथ था। इसके सरगना ओसामा बिन लादेन ने इस घटना की जिम्मेदारी ली। अमेरिका ने इसके बाद ‘वार ऑन टेरर’ यानी आतंक के खिलाफ वैश्विक युद्ध छेड़ा और 2001 में अफगानिस्तान पर हमला किया। वर्षों की तलाश के बाद 2011 में अमेरिकी नेवी सील ने पाकिस्तान के एबटाबाद में लादेन को मार गिराया।
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