अभिजीत मुहूर्त में अयोध्या में पीएम मोदी ने फहराया धर्म ध्वज, ‘मानसिक गुलामी खत्म करने का संकल्प’
अयोध्या (आरएनआई)। अभिजीत मुहूर्त में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवा धर्म ध्वज फहराया, और जय श्रीराम के उद्गारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इससे पूर्व प्रधानमंत्री ने सरसंघचालक के साथ मंदिर परिसर के सभी देवालयों में दर्शन और पूजा-अर्चना की। समारोह संपन्न होने के बाद वे साकेत कॉलेज पहुंचकर हेलीकॉप्टर से एयरपोर्ट गए और वहां से विशेष विमान से दिल्ली रवाना हुए।
ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि धर्म ध्वजा पर दर्शाया गया कोविदार वृक्ष भारत की हजारों वर्ष पुरानी पहचान और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने वाल्मीकि रामायण का उदाहरण देते हुए बताया कि चित्रकूट में भरत की सेना पहुंचने पर लक्ष्मण ने इसी ध्वज की पहचान से अयोध्या की सेना को पहचाना था। पीएम ने कहा कि यह वृक्ष हमें याद दिलाता है कि अपनी जड़ों को भुलाने पर पहचान खो जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 1835 में मैकॉले द्वारा मानसिक गुलामी का बीज बोया गया था और अगले 10 वर्षों में उसके 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश ने संकल्प लिया है कि आने वाले दशक में मानसिक गुलामी की सोच को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। नौसेना के ध्वज परिवर्तन को इसका उदाहरण बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी की मानसिकता ने राम को भी काल्पनिक बताने की कोशिश की, जबकि भारत की मिट्टी का कण-कण राममय है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को आने वाले हजार वर्षों तक मजबूती से खड़ा रखना है तो पहले हमें इस मानसिक जकड़न से मुक्त होना होगा।
प्रधानमंत्री ने अयोध्या के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर आधुनिक भारत का मेरुदंड बनकर उभर रहा है। आज यहां अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन, वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें हैं, और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद 45 करोड़ श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बन चुका है और वह दिन दूर नहीं जब भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।
अपने संबोधन की शुरुआत ‘सियावर रामचंद्र की जय’ से करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सदियों के घाव भर रहे हैं, सदियों की वेदना को विराम मिल रहा है और सदियों के संकल्प की सिद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि धर्म ध्वजा का भगवा रंग, सूर्य का चिन्ह और कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिबिंबित करते हैं। यह ध्वज आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा कि ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’। पीएम मोदी ने कहा कि हमें ऐसा समाज बनाना होगा जिसमें कोई गरीब, वंचित या पीड़ित न रहे। उन्होंने दानदाताओं, श्रमिकों, कारीगरों, योजनाकारों और वास्तुकारों को प्रणाम करते हुए कहा कि यही नगरी वह स्थान है जहां से प्रभु श्रीराम ने जीवन की यात्रा आरंभ की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक शक्ति आवश्यक है। उन्होंने मंदिर परिसर में बने सप्त मंदिरों का उल्लेख किया और कहा कि निषादराज, जटायु और गिलहरी की मूर्तियां बताती हैं कि बड़े संकल्पों की सिद्धि छोटे से छोटे योगदान से भी होती है। उन्होंने कहा कि भारत आज युवाओं, किसानों, महिलाओं और वंचितों के उत्थान पर केंद्रित होकर आगे बढ़ रहा है। 2047 में आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत का निर्माण हमारा सामूहिक लक्ष्य है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए भावी पीढ़ियों की चिंता जरूरी है, क्योंकि यह देश हमारे होने से पहले भी था और हमारे न रहने पर भी रहेगा। उन्होंने कहा कि राम को समझना ही राष्ट्र निर्माण की कुंजी है—राम यानी जनता के सुख को सर्वोपरि रखना, विवेक की पराकाष्ठा, कोमलता में दृढ़ता, श्रेष्ठ संगति का चयन और सत्य का अडिग संकल्प। पीएम मोदी ने कहा कि यदि समाज को सामर्थ्यवान बनाना है तो हर व्यक्ति में राम के आदर्शों को जागृत करना होगा, और आज से बेहतर शुरुआत का दिन दूसरा नहीं हो सकता।
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