H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार का नया शुल्क बना संकट: ग्रामीण स्कूलों व अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी का खतरा

Oct 9, 2025 - 09:22
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H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार का नया शुल्क बना संकट: ग्रामीण स्कूलों व अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी का खतरा

वॉशिंगटन/साउथ डकोटा (आरएनआई)। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले से ग्रामीण इलाकों के स्कूलों और अस्पतालों में संकट गहराता दिख रहा है। पहले से ही शिक्षकों और डॉक्टरों की भारी कमी झेल रहे इन संस्थानों के लिए अब विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करना लगभग असंभव हो जाएगा।

छोटे स्कूलों पर आर्थिक बोझ
साउथ डकोटा के क्रो क्रीक ट्राइबल स्कूल के सुपरिंटेंडेंट रॉब कवरडेल ने बताया कि उनके स्कूल में 15 शिक्षकों की कमी थी, जिसे उन्होंने फिलीपींस से आए शिक्षकों से पूरा किया। लेकिन अब नया शुल्क लगने के बाद यह प्रक्रिया ठप पड़ जाएगी। उन्होंने कहा,

“हमने विदेशी शिक्षकों को इसलिए रखा क्योंकि स्थानीय उम्मीदवार नहीं मिलते। वे किसी अमेरिकी की नौकरी नहीं ले रहे, बल्कि वो जगह भर रहे हैं जो खाली पड़ी रहतीं।”

ट्रंप प्रशासन का तर्क
प्रशासन ने 19 सितंबर को यह शुल्क लागू करते हुए कहा था कि कुछ नियोक्ता अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशों से सस्ते कामगार रख रहे हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह शुल्क मौजूदा वीजा धारकों पर लागू नहीं होगा और जरूरतमंद संस्थानों को शुल्क से छूट का आवेदन करने की अनुमति दी गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी संकट
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (AMA) के मुताबिक, अगले दशक में देश में 87,000 डॉक्टरों की कमी होने की संभावना है। ग्रामीण अस्पताल पहले ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं, और अब विदेशी डॉक्टरों की भर्ती महंगी होने से यह संकट और गहराएगा।

फेडरल कोर्ट में चुनौती
धार्मिक संस्थानों, छोटे अस्पतालों और शिक्षकों के संगठनों ने इस निर्णय के खिलाफ फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि यह शुल्क ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की आर्थिक रीढ़ तोड़ देगा।

फिलीपींस से आई शिक्षिका की कहानी
क्रो क्रीक स्कूल में पढ़ाने वाली मैरी जॉय पोंस-टोरेस, जो फिलीपींस में 24 साल तक शिक्षक रहीं, ने कहा,

“शुरुआत में सांस्कृतिक फर्क महसूस हुआ, लेकिन अब यह जगह मेरा दूसरा घर बन गई है। यहां के बच्चों को पढ़ाना गर्व की बात है।”

स्कूलों की चिंता
एरिजोना के अधीक्षक शॉन रिकर्ट ने कहा कि अगर यह शुल्क लागू हुआ, तो उन्हें एच-1बी शिक्षकों की भर्ती रोकनी पड़ेगी।

“हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं। हमें ऐसे स्थायी शिक्षक चाहिए जो समुदाय का हिस्सा बन सकें, लेकिन यह शुल्क हमें ऐसा करने से रोक देगा।”

भारत पर भी असर
यह नीति भारत जैसे देशों के लिए भी बड़ी चिंता है, क्योंकि एच-1बी वीजा धारकों में करीब 75% भारतीय हैं। हालांकि सबसे ज्यादा झटका उन अमेरिकी ग्रामीण इलाकों को लगेगा जो प्रवासी शिक्षकों और डॉक्टरों पर निर्भर हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह नीति लागू रहती है तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक संकट पैदा हो सकता है — स्कूलों को बिना प्रमाणपत्र वाले शिक्षकों से काम चलाना पड़ेगा, और अस्पतालों में इलाज के लिए विशेषज्ञों की कमी और बढ़ेगी।

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