DMK को OTP सत्यापन से रोकने वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, याचिका खारिज
21 जुलाई को हाईकोर्ट ने डीएमके को अपने नामांकन अभियान के लिए ओटीपी सत्यापन संदेशों का उपयोग करने से रोकते हुए एक निषेधाज्ञा जारी की थी। इसमें कहा गया कि यह मामला डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के पहलुओं से जुड़ा है, जिनकी अदालत की ओर से जांच की जानी है।
नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डीएमके के नामांकन अभियान 'ओरानियिल तमिलनाडु' के लिए ओटीपी सत्यापन संदेशों के इस्तेमाल पर मद्रास हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने डीएमके की अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला संवेदनशील है। पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है।
पीठ ने कहा, 'अदालत को नागरिकों की रक्षा करनी है। उच्च न्यायालय वापस जाएं। हम इस मामले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।' डीएमके की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी विल्सन ने दलील दी कि पार्टी आधार विवरण एकत्र नहीं कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने गलत आदेश पारित किया है, क्योंकि इस मामले में कोई रोक नहीं मांगी गई थी।
विल्सन ने कहा, 'मेरा पूरा कार्यक्रम ठप हो गया है। 1.7 करोड़ सदस्य आए हैं और विषयगत प्रस्ताव दिए हैं। मैं वही कर रहा हूं, जो भाजपा और आम आदमी पार्टी जैसी अन्य पार्टियां कर रही हैं। मैं आधार की जानकारी इकट्ठा नहीं कर रहा हूं।'
इससे पहले 21 जुलाई को हाईकोर्ट ने डीएमके को अपने नामांकन अभियान के लिए ओटीपी सत्यापन संदेशों का उपयोग करने से रोकते हुए एक निषेधाज्ञा जारी की थी। इसमें कहा गया कि यह मामला डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के पहलुओं से जुड़ा है, जिनकी अदालत की ओर से जांच की जानी है। हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि लोगों से व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया जा रहा है, इसलिए यह जनहित याचिका निजता के अधिकार और डेटा सुरक्षा के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।
शिवगंगा जिले के टी अथिकरई गांव के निवासी की याचिका पर लगी थी रोक
शिवगंगा जिले के टी अथिकरई गांव के निवासी एस राजकुमार की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह आदेश पारित किया। याचिका में कहा गया है कि डीएमके कार्यकर्ता और पदाधिकारी 'ओरानियिल तमिलनाडु' की आड़ में उनके इलाके में जनता से व्यक्तिगत और आधार विवरण एकत्र कर रहे हैं।
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