सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी ने चुना नेता प्रतिपक्ष, शोभनदेव चट्टोपाध्याय को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों बाद सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा में अपनी नई रणनीतिक टीम का एलान कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत और राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी ने संगठन और विधानसभा दोनों स्तरों पर सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है।
तृणमूल कांग्रेस ने असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक यानी चीफ व्हिप बनाया गया है। 82 वर्षीय शोभनदेव चट्टोपाध्याय पार्टी के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और जनवरी 1998 में पार्टी की स्थापना के समय से ही ममता बनर्जी के साथ जुड़े रहे हैं।
इधर चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष के बीच टीएमसी ने अनुशासनहीनता के आरोप में अपने तीन प्रवक्ताओं पर भी बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि इन नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर पार्टी नेतृत्व और नीतियों के खिलाफ बयान दिए।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही पांच अन्य प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के भीतर लगातार रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे थे।
विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 294 सदस्यीय सदन में 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। चुनावी हार के बाद अब टीएमसी विपक्ष की भूमिका में खुद को मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है।
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