तमिलनाडु की राजनीति में नया ‘नायक’: विजय ने बदले सियासी समीकरण
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सिनेमा और सत्ता का पुराना रिश्ता मजबूत होता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से जिस करिश्माई चेहरे की कमी महसूस की जा रही थी, वह जगह अब अभिनेता से नेता बने विजय भरते नजर आ रहे हैं। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
जे. जयललिता के 2016 में निधन और एम. करुणानिधि के 2018 में चले जाने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में ऐसा बड़ा जनाधार वाला चेहरा नहीं दिखा, जो सिनेमा और राजनीति दोनों में समान प्रभाव रखता हो। अब विजय को उसी खाली जगह को भरने वाले नए ‘सुपरस्टार नेता’ के रूप में देखा जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ दलों और फिल्मी हस्तियों के प्रभाव में रही है। एमजी रामचंद्रन, जिन्हें एमजीआर के नाम से जाना जाता है, ने फिल्मों से निकलकर राजनीति में ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। बाद में जयललिता ने भी उसी विरासत को आगे बढ़ाया। अब विजय की एंट्री को उसी परंपरा का नया अध्याय माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच तेजी से बढ़ रही है। पहली ही चुनावी चुनौती में उनकी रणनीति और जनसंपर्क शैली ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को सीधी चुनौती देने के संकेत दे दिए हैं। यही वजह है कि तमिलनाडु की आगामी राजनीति में विजय को एक बड़े फैक्टर के रूप में देखा जा रहा है।
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