जलवायु संकट गहराया: इतिहास का तीसरा सबसे गर्म अप्रैल, 1.5 डिग्री सीमा के बेहद करीब पहुंची दुनिया
दुनिया तेजी से ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां जलवायु परिवर्तन अब केवल वैज्ञानिक चेतावनी नहीं बल्कि एक स्पष्ट वैश्विक संकट बन चुका है। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 इतिहास का संयुक्त रूप से तीसरा सबसे गर्म अप्रैल दर्ज किया गया है। इस दौरान वैश्विक औसत तापमान 14.89 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औद्योगिक काल से पहले के स्तर की तुलना में 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया अब पेरिस जलवायु समझौता में तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की सुरक्षित सीमा के बेहद करीब पहुंच चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कमी नहीं लाई गई तो आने वाले वर्षों में सूखा, बाढ़, समुद्री तूफान और भीषण गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाएं और अधिक खतरनाक हो सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 का तापमान 1991 से 2020 के औसत से 0.52 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इससे पहले 2024 सबसे गर्म अप्रैल दर्ज किया गया था, जबकि 2025 दूसरे स्थान पर रहा। लगातार बढ़ते तापमान ने वैज्ञानिकों की चिंता और बढ़ा दी है।
डॉ. सामंथा बर्गेस ने कहा कि अप्रैल 2026 के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि समुद्रों का तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच चुका है, समुद्री हीटवेव तेजी से बढ़ रही हैं और आर्कटिक क्षेत्र की बर्फ तेजी से पिघल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु संकट अब भविष्य का खतरा नहीं बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। बढ़ती गर्मी और असामान्य मौसम का असर खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों और मानव जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं, जिससे कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर दबाव बढ़ रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0



