चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की मोर्चेबंदी, 'सामना' में शिवसेना UBT का दावा — दिल्ली तक लगेगा झटका
मुंबई (आरएनआई) — महाराष्ट्र में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया है कि मुंबई में विपक्षी दलों की ‘सत्यचा मोर्चा’ महारैली का असर “दिल्ली तक महसूस किया जाएगा”।
संपादकीय में लिखा गया है कि “संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के बाद पहली बार राज्य के सभी प्रमुख दल लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हुए हैं। यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक चेतना को झकझोर देगा।”
विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) — जिसमें शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), कांग्रेस और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) शामिल हैं — ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और फर्जी वोटर जोड़ने के आरोपों को लेकर शनिवार को मुंबई में बड़ा विरोध मार्च आयोजित किया।
पार्टी ने आरोप लगाया कि एक करोड़ से अधिक फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए हैं, और कहा कि यह भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की सुनियोजित कोशिश है।
संपादकीय में लिखा गया — “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से लेकर मतदाता सूची तक, हर जगह घोटाला हुआ है। इन गड़बड़ियों की वजह से ही भाजपा 2014 से सत्ता में लौटती रही है।”
संपादकीय में दावा किया गया है कि आगामी चुनावों से पहले 60 लाख नए मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे, जिनमें से कई दोहरे या फर्जी नाम हैं। उदाहरण देते हुए लिखा गया कि नासिक में 3.5 लाख और ठाणे के दिवा क्षेत्र में 17,000 दोहरे मतदाता हैं।
विपक्ष ने चुनाव आयोग से मांग की है कि जब तक मतदाता सूची की “त्रुटियों की जांच और सुधार” नहीं हो जाता, तब तक स्थानीय निकाय चुनाव टाले जाएं।
इस बीच, एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार के खिलाफ मुंबई पुलिस ने एक फर्जी आधार कार्ड मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। उन पर “ट्रंप” नाम से फर्जी आधार बनवाकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने की कोशिश का आरोप लगा है।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर रोहित पवार के मामले में इतनी तेजी से कार्रवाई हो सकती है, तो चुनाव आयोग पर कार्रवाई क्यों नहीं, जिसने लाखों फर्जी नाम जोड़ दिए?”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोर्चा खोल सकता है — खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले।
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