एसआईटी गठन पर वंतारा का बयान: 'कानून पालन और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध'
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने एसआईटी गठन का आदेश दिया और एसआईटी को 12 सितंबर तक जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट अब 15 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा।
नई दिल्ली (आरएनआई) रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर पर जानवरों से दुर्व्यवहार, उनकी खरीद में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। इसे लेकर वंतारा का बयान सामने आया है। वंतारा ने कहा है कि वे कानून के पालन और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। वंतारा ने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और साथ ही भविष्य में भी जानवरों के बचाव और उनके पुनर्वास के लिए काम करते रहेंगे।
वंतारा ने बयान में कहा 'हम माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं। वंतारा पारदर्शिता, सहयोग और कानून के पालन के प्रति समर्पित है।' वंतारा ने कहा कि 'हमारा मिशन जानवरों का बचाव और उनका पुनर्वास है। हम एसआईटी की जांच में पूरा सहयोग करेंगे और आगे भी पूरी गंभीरता से काम करेंगे। हमारी अपील है कि पूरी जांच बिना किसी चर्चा के और जानवरों के हितों को ध्यान में रखकर हो।'
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने एसआईटी गठन का आदेश दिया और एसआईटी को 12 सितंबर तक जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट अब 15 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा। चार सदस्यीय एसआईटी वन्यजीव सुरक्षा कानून, अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमन, जानवर कल्याण और पर्यावरण नियमों के पालन संबंधी जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वंतारा में जानवरों की गैरकानूनी तरीके से खरीद की गई। याचिका में ये भी आरोप है कि हाथियों, चिड़ियाओं और अन्य संरक्षित प्रजातियों के जीवों को तस्करी कर वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास के नाम पर वंतारा में लाया गया।
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