‘मौत की सजा के फैसले’ पर शेख हसीना की पहली प्रतिक्रिया; बोलीं— फैसला पक्षपातपूर्ण, राजनीति से प्रेरित
नई दिल्ली (आरएनआई)। बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी ठहराए जाने और मौत की सजा सुनाए जाने के एक दिन बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। हसीना ने इस निर्णय को “पक्षपाती, राजनीति से प्रेरित और धांधलीपूर्ण” करार दिया है।
शेख हसीना ने अपने बयान में कहा कि उनके खिलाफ दिया गया फैसला ऐसे न्यायाधिकरण का परिणाम है जिसकी स्थापना एक “अनिर्वाचित और बिना जनादेश वाली सरकार” ने की है। उनके अनुसार यह न्यायाधिकरण न तो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है और न ही इसमें किसी तरह की निष्पक्षता दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आईसीटी ने अवामी लीग के नेताओं को ही निशाना बनाया, जबकि विरोधी दलों से जुड़े लोगों द्वारा की गई हिंसा को नजरअंदाज किया गया।
हसीना ने आगे कहा कि उनके खिलाफ मांगी गई मौत की सजा से यह स्पष्ट होता है कि अंतरिम सरकार के कट्टरपंथी तत्व लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई अंतिम प्रधानमंत्री को हटाने और अवामी लीग को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा है।
पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने शासनकाल को लेकर लगाए गए मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने मानवाधिकारों और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का सदस्य बनाने, लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देने, बिजली और शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और पिछले 15 वर्षों में 450% से अधिक जीडीपी वृद्धि जैसे कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां किसी भी तरह से मानवाधिकारों की अवहेलना का संकेत नहीं देतीं।
गौरतलब है कि सोमवार को आईसीटी ने शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून को जुलाई 2023 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामलों में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी। न्यायाधिकरण के अनुसार इन अभियुक्तों के आदेश और मिलीभगत से 1400 से अधिक लोगों की मौत हुई और कई स्थानों पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर क्रूर कार्रवाई की गई।
फैसले के बाद बांग्लादेश में तनाव बढ़ गया है। राजधानी ढाका और कई संवेदनशील जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। अवामी लीग ने इसके विरोध में देशभर में बंद का आह्वान किया है। सरकार ने संकेत दिया है कि फैसले पर जल्द अमल होगा, हालांकि अपील तभी संभव है जब दोषी व्यक्ति खुद को अदालत के हवाले करे या गिरफ्तार हो—और शेख हसीना अभी भारत में हैं।
इस प्रकार, न्यायाधिकरण का फैसला और उस पर शेख हसीना की तीखी प्रतिक्रिया बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े टकराव की शुरुआत मानी जा रही है, जिसका आने वाले दिनों में व्यापक असर दिखाई दे सकता है।
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