‘तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे ठाकरे बंधु’, मंत्री आशीष शेलार का आरोप — कहा, सरकारी कर्मचारियों पर डाला जा रहा दबाव
मुंबई (आरएनआई) — महाराष्ट्र में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। सत्ताधारी भाजपा ने विपक्षी दलों पर पलटवार करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता आशीष शेलार ने रविवार को कहा कि विपक्ष झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा राज्य समेत 12 राज्यों में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देकर जनता को गुमराह कर रहा है।
शेलार ने आरोप लगाया, “ठाकरे बंधु और महा विकास अघाड़ी के नेता सरकारी मशीनरी पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। वे आगामी निकाय चुनावों के लिए माहौल बिगाड़ने और मतदाताओं को बांटने की साजिश कर रहे हैं।”
‘हिंदू-मुस्लिम बंटवारे के बीज बो रहे हैं ठाकरे’
भाजपा मंत्री ने कहा, “वे हमारा राजनीतिक रूप से विरोध कर सकते हैं, लेकिन इतनी नीचता पर नहीं उतरना चाहिए। वे हिंदू मतदाताओं की कथित दोहरी एंट्री पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन ऐसा करके हिंदू-मुस्लिम बंटवारे के बीज बो रहे हैं। उन्होंने कभी अन्य समुदायों की एंट्री पर सवाल क्यों नहीं उठाया?”
शेलार ने सवाल उठाया, “मराठी लोगों पर ही फर्जी मतदाता सूची के आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं? एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने करजत-जामखेड विधानसभा क्षेत्र में फर्जी एंट्री का आरोप लगाया, लेकिन उसी सूची में इमरान कादर और तबस्सुम अब्दुल मुलानी जैसे अन्य समुदायों के नाम भी दोहराए गए हैं। यह ठाकरे बंधुओं को क्यों नहीं दिखा?”
उन्होंने आगे कहा कि “फर्जी एंट्री केवल हिंदू या मराठी नामों में नहीं हैं, बल्कि मुस्लिम और अन्य समुदायों में भी कई बार दोहराव है, लेकिन विपक्ष केवल चुनिंदा मामलों को तूल दे रहा है।”
शिवसेना (यूबीटी) में असंतोष
इस बीच, किसान नेता किशोर तिवारी ने शिवसेना (यूबीटी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मनसे के साथ गठबंधन के फैसले पर नाराजगी जताई और कहा कि “मनसे हिंदी भाषी, भाषाई अल्पसंख्यकों और मुस्लिमों के खिलाफ बयानबाजी करती रही है, जबकि विपक्षी गठबंधन की रीढ़ यही वर्ग हैं।”
तिवारी पहले शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता भी रह चुके हैं, लेकिन फरवरी में उन्हें उस पद से हटा दिया गया था।
राज्य में बीएमसी सहित सभी निकायों के चुनाव जनवरी 2026 तक होने हैं, और इनसे पहले राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने साफ कहा है कि वह विपक्ष के “तुष्टिकरण के एजेंडे” को जनता के सामने बेनकाब करेगी।
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