सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो गहरे संकट में, 21 हजार करोड़ की मार्केट वैल्यू डूबी, ऑपरेशन और प्रबंधन पर उठे सवाल

Dec 7, 2025 - 12:19
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सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो गहरे संकट में, 21 हजार करोड़ की मार्केट वैल्यू डूबी, ऑपरेशन और प्रबंधन पर उठे सवाल

नई दिल्ली (आरएनआई) भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो इन दिनों अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही है। अचानक बढ़ी फ्लाइट कैंसिलेशन, किराये पर सरकारी हस्तक्षेप और पायलट प्रबंधन को लेकर विवादों के बीच कंपनी का मार्केट कैप करीब 21,000 करोड़ रुपये तक गिर गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति केवल ऑपरेशनल गड़बड़ी का परिणाम नहीं, बल्कि प्रबंधन, स्टाफिंग मॉडल और नए FDTL नियमों के प्रति अपर्याप्त तैयारी से उत्पन्न ढांचेगत चुनौती है, जो एयरलाइन की कामयाबी के मूल ढांचे पर सवाल खड़े कर रही है।

लगभग 60 प्रतिशत घरेलू मार्केट शेयर, 90 से अधिक घरेलू और 40 अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ान संचालित करने वाली इंडिगो के पास इस समय 417 विमानों का विशाल बेड़ा है। कंपनी रोजाना 2300 से ज्यादा उड़ानें भरती है। तेज विस्तार और समयबद्ध सेवाओं को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताने वाली इंडिगो अब उन्हीं दबावों के बोझ तले चरमरा रही है। पायलट यूनियन का आरोप है कि मैनेजमेंट को पहले से पता होने के बावजूद नए ड्यूटी नियमों के अनुसार पर्याप्त तैयारी नहीं की गई, जिससे नेटवर्क संचालन प्रभावित हुआ है।

सरकार को हस्तक्षेप कर किराये को नियंत्रित करना पड़ा है, वहीं यात्रियों के लिए उड़ानों की अनिश्चितता और बढ़ते किराये परेशानियों का कारण बने हुए हैं। निवेशक भी चिंतित हैं क्योंकि इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की बाजार वैल्यू में आई बड़ी गिरावट को वे एक तात्कालिक राहत पाने योग्य समस्या नहीं मान रहे।

इंडिगो की सफलता की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। दिल्ली के कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले राहुल भाटिया ने 2004 में एनआरआई एविएशन विशेषज्ञ राकेश गंगवाल के साथ इंटरग्लोब एविएशन की स्थापना की। 2005 में पेरिस एयर शो के दौरान कंपनी ने एक ही बार में एयरबस A-320 विमानों के 100 ऑर्डर देकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। कम पूंजी के साथ यह निर्णय भविष्य में इंडिगो की मजबूत उड़ान की नींव बना और कंपनी ने “समय पर, सस्ता और सरल” सेवा मॉडल के साथ भारतीय यात्रियों का भरोसा जीता।

हालांकि विस्तार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर दोनों संस्थापकों के बीच बढ़ते मतभेदों ने 2022 में गंगवाल को बोर्ड छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद से कई विशेषज्ञ मानते हैं कि एयरलाइन की परिचालन रणनीति में संतुलन की कमी दिखाई देने लगी है।

आज इंडिगो की चुनौती सिर्फ वर्तमान संकट से निकलने की नहीं, बल्कि यह साबित करने की भी है कि उसका विस्तार मॉडल भविष्य के एयर ट्रैवल की बड़ी जरूरतों के साथ सुरक्षित और टिकाऊ रूप में आगे बढ़ सकता है। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि भारत की आसमान की इस बादशाहत को संभाला जा सकेगा या यह दबाव उसके लिए और मुसीबतें खड़ी करेगा।

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