विक्रम 1601: मोदी से पांच साल पहले ही भारत ने विकसित कर ली थी स्वदेशी चिप
नई दिल्ली (आरएनआई) – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2009 में पूरी तरह स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर “विक्रम 1601” विकसित किया था, जो आज भी भारतीय रॉकेटों की एवियोनिक्स प्रणालियों में इस्तेमाल होता है। इसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) द्वारा डिज़ाइन किया गया और चंडीगढ़ के सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL) में निर्मित किया गया।
16-बिट “विक्रम 1601” चिप का उपयोग रॉकेट स्टेज मापदंडों के प्रबंधन और मार्गदर्शन एल्गोरिदम के क्रियान्वयन के लिए किया गया। यह परियोजना पूरी तरह स्वदेशी थी और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए मील का पत्थर मानी जाती है।
इसके बाद इसी प्रयोगशाला में “विक्रम 3201”, 32-बिट स्पेस-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया गया, जो विक्रम 1601 से अधिक उन्नत है और आज की अंतरिक्ष आवश्यकताओं के अनुसार प्रयोग में लाया जाता है।
विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से लगभग पांच साल पहले ही हासिल हो चुकी थी। जबकि उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस सफलता का प्रचार-प्रसार नहीं किया, मोदी सरकार के दौरान इसे बार-बार “पहली बार” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकरण में यह स्पष्ट होता है कि भारत की स्वदेशी तकनीक और विज्ञान में उपलब्धियां लगातार आगे बढ़ रही हैं, और इनके पीछे वैज्ञानिकों की मेहनत ही असली प्रेरणा है।
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