मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 44 सील भवनों को गिराने के आदेश, 15 दिन की मोहलत
मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भवन स्वामियों और व्यापारियों को बड़ा झटका देते हुए 44 सील व्यावसायिक भवनों को ध्वस्त करने के आदेश बरकरार रखे हैं। अदालत ने भवन स्वामियों को 15 दिनों के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई न होने पर आवास एवं विकास परिषद ध्वस्तीकरण करेगी और इसका पूरा खर्च संबंधित भवन स्वामियों से वसूला जाएगा।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आवासीय भवनों का पूर्ण रूप से व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है और ऐसे अवैध निर्माणों को किसी भी स्थिति में वैध नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि अवैध निर्माणों को नियमित करने या उन्हें किसी प्रकार की राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आवास एवं विकास परिषद की ओर से प्रस्तुत 1,468 अवैध निर्माणों की सूची पर भी संज्ञान लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि केवल 44 भवनों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि सभी अवैध निर्माणों के विरुद्ध समान रूप से नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फैसले के बाद सेंट्रल मार्केट में निराशा का माहौल देखने को मिला। लंबे समय से धरने पर बैठी कई महिलाओं और व्यापारियों की आंखें नम हो गईं। भवन स्वामियों का कहना है कि फैसले से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।
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