मंदसौर मिल भूमि विवाद में नया मोड़, प्रशासन ने डबल बेंच में रखी मजबूत पैरवी
अशोकनगर (आरएनआई) जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट के सामने की अरबों रु की 27 बीघा बेशकीमती भूमि 1929 में मंदसौर के सेठ मुरलीधर दास को जिनिंग मिल लगाने हेतु शासन द्वारा लीज पर दी थी। तब से यह मंदसौर मिल भूमि के नाम से जानी जाती है।लेकिन भूमि भू माफिया के चंगुल में फस गई। भूमि को माफियाओं से मुक्त करने के लिए शासन लंबी लड़ाई लड़ रहा है। उक्त भूमि के मामले में उच्च न्यायलय में प्रकरण क्र. 2269/2009 में प्रशासन के पूर्व अधिकारियों द्वारा पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये थे और शासन के वकील अपना पक्ष सिंगल बेंच में सही तरीके से नहीं रख पाया था। अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह द्वारा मंदसौर मिल भूमि विवाद को गंभीरता से लेते हुए शासन का पक्ष ताकत के साथ डबल बेंच में रखा जा रहा है। अब भूमि मुक्त होने की एक बढ़ी उम्मीद जागी है। प्रशासनिक स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन को उक्त भूमि के संबंध में 1967 का राजस्व मंडल का एक अहम दस्तावेज हाथ लगा है जिससे ये सिद्ध होता है कि भूमि जिनिंग मिल लगाने के लिए ही दी गई थी। भूमि मामले की आगामी सुनवाई 17 नम्बर को उच्च न्यायालय की डबल बैंच में लगा हैं।
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