पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
नई दिल्ली: देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि पेपर लीक मामलों की समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक समान मानक प्रक्रिया (SOP) और विशेष जांच तंत्र तैयार किया जाए।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक कानून, मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और काले धन से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही पेपर लीक के आरोपियों और अपराध में कथित रूप से शामिल उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्तियां जब्त करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और भारत के विधि आयोग को पक्षकार बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर गंभीर आर्थिक, मानसिक और शैक्षिक प्रभाव पड़ रहा है।
याचिका के अनुसार, पेपर लीक मामलों की प्रभावी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में लगातार विफलता संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त समानता, अवसर और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में 3 मई 2026 को कथित NEET पेपर लीक का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस घटना ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया और परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर किया। याचिका में दावा किया गया है कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्रों को आर्थिक नुकसान, शैक्षिक अवसरों की हानि, मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
### पारसनाथ डेवलपर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पारसनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने का आदेश दिया है। अदालत ने कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ नागरिकों को लंबे समय से उनके घरों का कब्जा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। अदालत ने हरियाणा सरकार के तंत्र और बिल्डर के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका व्यक्त करते हुए नियामक एजेंसियों की निष्क्रियता पर भी गंभीर चिंता जताई।
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