महाराष्ट्र में CAG का बड़ा खुलासा: चार साल तक 'घोस्ट हॉस्टलों' पर खर्च होते रहे सरकारी पैसे

Monday, July 13, 2026 - 17:45
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महाराष्ट्र में CAG का बड़ा खुलासा: चार साल तक 'घोस्ट हॉस्टलों' पर खर्च होते रहे सरकारी पैसे

महाराष्ट्र में छात्रावास व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के छह ऐसे 'घोस्ट हॉस्टल', जहां एक भी छात्र नहीं रह रहा था, उन्हें लगातार चार वर्षों तक सरकारी फंड मिलता रहा। इन बंद पड़े छात्रावासों पर कुल 1.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

10 जुलाई को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई CAG की कंप्लायंस ऑडिट रिपोर्ट-2024 में पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए संचालित सरकारी एवं अनुदानित छात्रावासों की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में बुनियादी सुविधाओं की कमी, सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी खामियां, वित्तीय अनियमितताएं, दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की अनदेखी, बायोमेट्रिक प्रणाली की विफलता, स्टाफ की कमी और अधूरे निर्माण कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग ने चार वर्षों तक ऐसे छह छात्रावासों को 1.62 करोड़ रुपये जारी किए, जो वास्तव में संचालित ही नहीं हो रहे थे। CAG ने इसे सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताते हुए इन संस्थानों को 'घोस्ट हॉस्टल' की श्रेणी में रखा है।

मार्च 2024 तक महाराष्ट्र में 443 सरकारी और 2,388 सरकारी सहायता प्राप्त छात्रावास संचालित थे, जिनमें 1,21,971 छात्र और 40,543 छात्राएं पंजीकृत थीं। ऑडिट अवधि के दौरान राज्य सरकार ने इन छात्रावासों पर कुल 2,321 करोड़ रुपये खर्च किए।

रिपोर्ट तैयार करने के दौरान CAG की टीम ने 18 सरकारी और 21 सरकारी सहायता प्राप्त छात्रावासों का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच में कई जगह जर्जर भवन, बंद पड़े हॉस्टल, खाली बिस्तर और रिकॉर्ड व वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर पाया गया, जिसके बाद छात्रावास प्रबंधन और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

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