बाल विवाह के खिलाफ निर्णायक लड़ाई: केंद्र सरकार का 100 दिनों का विशेष जागरूकता अभियान शुरू
नई दिल्ली (आरएनआई) केंद्र सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ बड़ी पहल करते हुए गुरुवार को देशव्यापी विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की। महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस अभियान का शुभारंभ करते हुए कहा कि बाल विवाह बेटियों का बचपन छीन लेता है और उन्हें समय से पहले मातृत्व की ओर धकेल देता है। यह न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि किशोर आयु की बच्चियों के लिए गंभीर मानसिक और शारीरिक पीड़ा का कारण बनता है।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं को जोड़ा जा रहा है। साथ ही ग्राम पंचायतों और नगर निगम स्तर पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि बाल विवाह की कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सके।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ देश ने वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा—“हमारे लिए एक भी बाल विवाह स्वीकार्य नहीं है। देश को बाल विवाह पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी।” उन्होंने याद दिलाया कि बाल विवाह के खिलाफ कानूनी लड़ाई 1929 के शारदा एक्ट से शुरू हुई थी और इसे 2006 के कानून के तहत और मजबूत किया गया है।
मंत्री ने यह भी बताया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इससे लिंगानुपात में सुधार हुआ है और उच्च शिक्षा में बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
कार्यक्रम में शामिल मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने कहा कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है, सामाजिक स्तर पर मानसिकता बदलनी भी उतनी ही ज़रूरी है।
यह विशेष अभियान 27 नवंबर 2025 से 8 मार्च 2026 तक चलेगा। इस दौरान स्कूलों, समुदायों और धार्मिक मंचों पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम होंगे, जिससे हर स्तर पर यह संदेश पहुंचे कि बाल विवाह न केवल अपराध है, बल्कि बेटियों के सपनों पर निर्मम कुठाराघात भी।
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