पीएम मोदी बोले – 1937 में विभाजन के बीज बोए गए, वही सोच आज भी देश के लिए बड़ी चुनौती
नई दिल्ली (आरएनआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक वर्षव्यापी स्मरणोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक स्वप्न और एक संकल्प है। यह मां भारती की साधना और आराधना का प्रतीक है, जो हमारे इतिहास को गौरव से भरता है और भविष्य के लिए नया हौसला देता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी के कालखंड में ‘वंदे मातरम्’ आजादी के संकल्प का उद्घोष बन गया था। यह उद्घोष था मां भारती के हाथों से गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का, ताकि भारतवासी स्वयं अपने भाग्य के विधाता बन सकें। उन्होंने कहा कि अंग्रेज भारत को पिछड़ा बताकर अपने शासन को उचित ठहराते थे, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ की पहली पंक्ति ने उस दुष्प्रचार को ध्वस्त कर दिया। यही कारण है कि यह गीत केवल आजादी का प्रतीक नहीं बना, बल्कि स्वतंत्र भारत का सपना भी प्रस्तुत किया — ‘सुजलाम सुफलाम’ भारत का।
पीएम मोदी ने महात्मा गांधी के 1927 के कथन को याद करते हुए कहा कि गांधीजी ने कहा था – ‘वंदे मातरम् हमारे सामने पूरे भारत की अखंड तस्वीर प्रस्तुत करता है।’ उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज में समय-समय पर बदलाव हुए हैं, लेकिन जब भी तिरंगा फहराया जाता है, तो स्वतः ही देशवासी के मुख से ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारे गूंज उठते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में दुनिया ने भारत के नए स्वरूप का उदय देखा है। आज भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है और विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर चुका है। उन्होंने कहा कि जब दुश्मनों ने आतंकवाद के माध्यम से भारत की सुरक्षा और सम्मान पर प्रहार करने का दुस्साहस किया, तो पूरी दुनिया ने देखा कि नया भारत मानवता की सेवा में ‘कमला-विमला’ का स्वरूप है, लेकिन आतंकवाद के विनाश के लिए ‘दुर्गा’ बनना भी जानता है।
अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने यह भी कहा कि 1937 में जो विभाजन के बीज बोए गए थे, वही मानसिकता आज भी देश के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें उस सोच से ऊपर उठकर एकता, अखंडता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करना होगा।
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