परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी पर ज़ोर, PK मिश्रा बोले– लागत घटाना भी उतना ही अहम
पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने कहा कि परमाणु ऊर्जा को सस्ती और व्यावहारिक बनाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी, सस्ती फंडिंग और नियामक सुधार जरूरी हैं। इसके साथ ही उन्होंने वैज्ञानिकों से लागत घटाने और तकनीकी नवाचार पर भी जोर दिया।
मुंबई (आरएनआई) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की व्यवहार्यता में सुधार के लिए कम लागत वाले वित्तपोषण और निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को आकर्षित करने के लिए सरकार को वित्तपोषण के विकल्प और नियामक ढांचे में सुधार करना चाहिए। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक अधिकारियों के 68वें बैच को संबोधित करते हुए मिश्रा ने शोधकर्ताओं को लागत में कमी लाने की रणनीतियों में नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा को भारत का पसंदीदा ऊर्जा स्रोत बनाया जा सके।
साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र के अपार संभावनाओं का हवाला देते हुए मिश्रा ने कहा कि परमाणु ऊर्जा के लिए भी इसी तरह की पहल की परिकल्पना की गई है, जो स्वच्छ ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के सामाजिक प्रभाव पर जोर दिया और कैंसर की देखभाल के लिए रेडियो आइसोटोप और अपशिष्ट जल उपचार एवं कृषि भंडारण के लिए विकिरण तकनीकों के उपयोग का हवाला दिया।
मिश्रा ने कहा कि सरकार ने 2024-25 के केंद्रीय बजट के तहत एमएसएमई क्षेत्र के लिए 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों को मंजूरी दी है। मिश्रा ने वैज्ञानिक समुदाय से अनुसंधान प्रयोगशालाओं से उभरने वाली स्पिन-ऑफ तकनीकों का व्यावसायीकरण करने का भी आग्रह किया। ये यूनिट्स 12 राज्यों में काम कर रही हैं और फलों, मसालों, दालों और जड़ी-बूटियों जैसी चीजों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद कर रही हैं, साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुकूल बना रही हैं।
मिश्रा ने वैज्ञानिकों से यह भी कहा कि वे रिसर्च से निकली तकनीकों को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ाएं ताकि आम लोगों को उसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए परमाणु ऊर्जा एक स्थायी और स्वच्छ ऊर्जा विकल्प बन सकती है। इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी रिसर्च और नियमों की समीक्षा भी जरूरी है, खासकर जब निजी कंपनियां इसमें भाग ले रही हैं। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इसके साथ ही मिश्रा ने 2024-25 के बजट की कुछ प्रमुख घोषणाओं का भी जिक्र किया, जैसे 'भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' और उन्नत परमाणु तकनीकों के लिए आरएंडडी समर्थन और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य। इसके लिए जरूरी कानूनों में संशोधन कर निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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