गौतम अडानी ने छोड़ा APSEZ का कार्यकारी चेयरमैन पद, अब बने गैर-कार्यकारी चेयरमैन – क्यों लिया बड़ा फैसला?
मुंबई/अहमदाबाद (आरएनआई) अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) में बड़ा बदलाव हुआ है। समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। अब वह गैर-कार्यकारी चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे।
यह बदलाव 5 अगस्त से प्रभावी हो गया है। इस फैसले की जानकारी कंपनी ने शेयर बाजार को औपचारिक सूचना देकर दी, जो कि नामांकन और पारिश्रमिक समिति की सिफारिश के आधार पर लिया गया। इसका अर्थ है कि अब गौतम अडानी कंपनी के प्रमुख प्रबंधकीय पद पर नहीं रहेंगे।
क्या है इसका मतलब? क्यों छोड़ा सबसे बड़ा पद?
यह बदलाव ऐसे समय पर हुआ है जब कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा 6.54% बढ़कर ₹3,310.60 करोड़ पहुंच गया है। इसके बावजूद, नेतृत्व परिवर्तन ने अटकलों को जन्म दिया है।
गौतम अडानी के गैर-कार्यकारी चेयरमैन बनने का मतलब यह है कि वे अब कंपनी के दैनिक कामकाज और रणनीतिक निर्णयों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं रहेंगे, बल्कि अब एक नीतिगत भूमिका निभाएंगे।
कंपनी के तिमाही नतीजे
मुनाफा: ₹3,107.23 करोड़ से बढ़कर ₹3,310.60 करोड़ (6.54% वृद्धि)
कुल आय: ₹8,054.18 करोड़ से बढ़कर ₹9,422.18 करोड़
कुल खर्च: ₹4,238.94 करोड़ से बढ़कर ₹5,731.88 करोड़
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कंपनी का ऑपरेशन और राजस्व बढ़ रहा है, लेकिन खर्चों में भी तीव्र वृद्धि हो रही है।
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
तिमाही नतीजों के दिन ही कंपनी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई:
शेयर गिरकर ₹1357.55 पर बंद हुआ (2.38% की गिरावट)
दिन में यह ₹1345.55 के निचले स्तर तक पहुंचा
इससे पहले सोमवार को शेयर ₹1390.60 पर बंद हुआ था
यह गिरावट संभवतः नेतृत्व परिवर्तन और खर्चों में वृद्धि से जुड़ी निवेशकों की चिंता को दर्शाती है।
नए स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति
APSEZ ने मनीष केजरीवाल को गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक के रूप में तीन वर्ष की शुरुआती अवधि के लिए नियुक्त किया है। उनके नियुक्ति को तीन महीने के भीतर शेयरधारकों की मंजूरी मिलना आवश्यक है।
कंपनी की उपस्थिति
APSEZ, अडानी ग्रुप की एक प्रमुख कंपनी है जिसकी:
भारत में 15 बंदरगाह
भारत के बाहर 4 बंदरगाहों पर उपस्थिति है
यह कंपनी देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक बड़ी भूमिका निभा रही है।
विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव गवर्नेंस सुधार और प्रोफेशनल मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के लिए किया गया हो सकता है। साथ ही, यह अडानी ग्रुप की कंपनियों में संस्थागत पारदर्शिता लाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम हो सकता है।
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