खाली सीटें होने के बावजूद यात्री को नहीं दी सीट, टीसी के व्यवहार पर उठे सवाल

Jun 4, 2026 - 12:03
Jun 4, 2026 - 12:04
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खाली सीटें होने के बावजूद यात्री को नहीं दी सीट, टीसी के व्यवहार पर उठे सवाल

रुठियाई/कोटा (आरएनआई)। रेलवे में यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और मनमानी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। एक बार फिर ऐसा ही मामला ट्रेन संख्या 22983/22984 कोटा–इंदौर वाया रुठियाई मार्ग से सामने आया है, जहां एक यात्री ने टीसी महेश मीना पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार, यात्री ने गुना से इंदौर जाने के लिए सामान्य (जनरल) टिकट लिया था। रुठियाई स्टेशन पहुंचने पर उसने देखा कि डी-4 कोच में अनेक सीटें खाली पड़ी हुई हैं। यात्री ने टीसी महेश मीना से अनुरोध किया कि उसके जनरल टिकट को नियमानुसार आरक्षित श्रेणी में अपग्रेड कर दिया जाए, ताकि वह खाली सीट पर यात्रा कर सके। आरोप है कि टीसी ने यात्री से अनावश्यक रुपये मांगे जब यात्री ने कहां टिकिट होने के बाद डी 4 ,रु 300 नही लगते इसी बात को सुनने के बजाय अभद्र व्यवहार किया और कोई सहायता नहीं की।

यात्री द्वारा बनाए गए वीडियो में वह लगातार यह कहते हुए दिखाई दे रहा है कि कोच में सीटें खाली हैं तथा कई सामान्य टिकटधारी यात्री भी बैठे हुए हैं, लेकिन टीसी न तो टिकट जांचने पहुंचे और न ही यात्रियों को नियमानुसार सीट उपलब्ध कराने का प्रयास किया। इससे रेलवे कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और यात्रियों के प्रति उनके व्यवहार पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

क्षेत्र में लंबे समय से यह शिकायत सुनने में आती रही है कि कोटा मंडल के कुछ कर्मचारियों का यात्रियों के प्रति व्यवहार रूखा और असहयोगपूर्ण रहता है। ताजा घटना ने इन शिकायतों को और बल दिया है। यदि वास्तव में खाली सीटें उपलब्ध थीं तो यात्री को नियमानुसार सुविधा क्यों नहीं दी गई, यह जांच का विषय है।

सामाजिक कार्यकर्ता सुनील आचार्य ने यात्री की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बिना विलंब किए कोटा डीआरएम को पूरे मामले से अवगत कराया है तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित टीसी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी यात्री को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

यात्रियों का कहना है कि रेलवे का उद्देश्य जनसेवा है, लेकिन यदि कर्मचारी ही यात्रियों को परेशान करने लगें तो आम जनता का भरोसा कमजोर होता है। रेलवे प्रशासन से अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे।

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