‘अर्थव्यवस्था में हमारा बड़ा योगदान लेकिन हक से वंचित’ — प्रियांक खरगे का केंद्र पर भेदभाव का आरोप
बेंगलुरु (आरएनआई): कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर राज्य के साथ वित्तीय भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देने वाले राज्यों में शामिल है, फिर भी कर वितरण में उसके साथ न्याय नहीं हो रहा।
पत्रकारों से बातचीत में प्रियांक खरगे ने कहा, “बिहार चुनाव का कर्नाटक के हिस्से के कर वितरण से कोई संबंध नहीं है, फिर भी हमारे हिस्से की राशि रोकी जा रही है। यह सीधा-सीधा अन्याय है।”
“हम योगदान देते हैं, लेकिन इनाम नहीं मिलता”
खरगे ने कहा कि कर्नाटक भारत का ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब है और देश की आर्थिक वृद्धि में उसकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा, “हम देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में बड़ा योगदान देते हैं। हमारे वित्त मंत्री दो बार दिल्ली जाकर अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। यह भेदभाव कर्नाटक की जनता के साथ अन्याय है।”
मंत्री ने आगे कहा कि चाहे केंद्र सरकार का नारा ‘अमृत काल’, ‘विकसित भारत’ या ‘मेक इन इंडिया’ हो — इन सबका असली केंद्र कर्नाटक ही है, क्योंकि देश की तकनीकी, औद्योगिक और नवाचार गतिविधियों का अधिकांश हिस्सा यहीं से संचालित होता है।
“हक मांग रहे हैं, एहसान नहीं”
कांग्रेस नेता ने कहा, “हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं, कोई एहसान नहीं। हमें हमारे योगदान के अनुरूप हिस्सा मिलना चाहिए ताकि राज्य में और अधिक निवेश और रोजगार के अवसर बन सकें।”
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कर वितरण की नीति में पारदर्शिता लाए और राज्यों को उनके योगदान और जरूरत के आधार पर न्यायसंगत हिस्सा दे।
कर्नाटक सरकार बनाम केंद्र
खरगे का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार लगातार केंद्र पर वित्तीय अन्याय के आरोप लगा रही है। राज्य सरकार का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद से कर्नाटक को कर वितरण में अपेक्षित हिस्सा नहीं मिल रहा, जिससे विकास परियोजनाओं पर असर पड़ रहा है।
राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर जल्द ही प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से औपचारिक मुलाकात करने की तैयारी में है।
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