UPCA पर गंभीर आरोप: ‘उत्तर प्रदेश’ नाम का अवैध इस्तेमाल, खिलाड़ियों से करोड़ों की वसूली और फर्जी चयन का मामला गरमाया
लखनऊ (आरएनआई) उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) पर राज्य के नाम का अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल, खिलाड़ियों से आर्थिक शोषण और फर्जी पहचान पत्र के जरिए बाहरी खिलाड़ियों को चयनित करने के आरोपों ने खेल जगत में हड़कंप मचा दिया है। शिकायतकर्ता ने इसे “उत्तर प्रदेश की खेल गरिमा पर हमला” बताते हुए तत्काल FIR और कठोर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था होने के बावजूद UPCA ने "उत्तर प्रदेश" के नाम पर पूर्ण व्यावसायिक टूर्नामेंट UPT20 आयोजित किया। छह फ्रेंचाइज़ी टीमों को ₹5–₹7 करोड़ में बेचा गया, जबकि प्रत्येक टीम ने लगभग 5,000 खिलाड़ियों से ₹1,000–₹2,500 शुल्क लेकर ट्रायल आयोजित किए। अनुमानित रूप से करीब 30,000 खिलाड़ियों से ₹30 करोड़ से अधिक केवल फॉर्म शुल्क में वसूले गए। आरोप है कि यह राशि खिलाड़ियों के विकास में न लगकर आयोजकों और प्रभावशाली व्यक्तियों की जेब में जा रही है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि UPCA में चयन के दौरान घूसखोरी पहले से होती रही है और कई खिलाड़ियों ने फर्जी पहचान पत्र बनवाकर टीम में जगह पाई। इनमें अधिकांश अन्य राज्यों के खिलाड़ी बताए जा रहे हैं।
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों मोहम्मद कैफ, सुरेश रैना और भुवनेश्वर कुमार जैसे दिग्गजों के योगदान का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि ऐसे भ्रष्टाचार से प्रदेश की खेल छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने मांग की है कि —
UPCA और आयोजकों के खिलाफ अवैध नाम उपयोग और आर्थिक शोषण के लिए FIR दर्ज की जाए।
खिलाड़ियों से वसूली गई रकम की जांच और जब्ती हो।
फर्जी दस्तावेज से चयनित खिलाड़ियों और चयनकर्ताओं पर आपराधिक कार्रवाई हो।
भविष्य में इस तरह की लूट और नाम के दुरुपयोग पर स्थायी प्रतिबंध लगे।
मामले के सामने आने के बाद खेल प्रशासनों और क्रिकेट प्रेमियों में नाराजगी है, और अब सभी की नजरें इस पर हैं कि क्या सरकार और खेल विभाग इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
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